तुवर का भाव नरम पड़ने से तुवर दाल की कीमतों में भारी गिरावट
06-May-2025 07:20 PM
मुम्बई। केन्द्रीय उपभोक्ता मामले विभाग के मुख्य निगरानी प्रकोष्ठ द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि 5 मई 2025 को राष्ट्रीय स्तर पर तुवर दाल का मॉडल खुदरा मूल्य घटकर 120 रुपए प्रति किलो रह गया फरवरी 2025 में प्रचलित भाव 160 रुपए प्रति किलो से करीब 25 प्रतिशत कम है।
घरेलू उत्पादन में वृद्धि होने तथा विदेशों से भारी आयात जारी रहने के कारण तुवर की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति में काफी सुधार आ गया जबकि मांग कमजोर पड़ गई क्योंकि उपभोक्ताओं को सस्ते दाम पर पीली मटर देसी चना की पर्याप्त आपूर्ति मिल रही थी।
हालांकि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने तुवर का घरेलू उत्पादन 2023-24 सीजन के 34.20 लाख टन से महज 90 हजार टन बढ़कर 2024-25 के सीजन में 35.10 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान लगाया है लेकिन उद्योग-व्यापार क्षेत्र का मानना है कि वास्तविक उत्पादन सरकारी अनुमान से 10-15 प्रतिशत अधिक हुआ है।
मंडियों में इसकी अच्छी आवक हो रही है। महाराष्ट्र में भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आ गया है जबकि अन्य उत्पादक राज्यों में भी समर्थन मूल्य से ज्यादा ऊंचा नहीं है। इस बार तुवर की सरकारी खरीद में शानदार बढ़ोत्तरी होने के संकेत मिल रहे हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में म्यांमार, मोजाम्बिक, तंजानिया एवं मलावी सहित कुछ अन्य देशों से तुवर का आयात बढ़कर 11 लाख टन से ऊपर पहुंच गया। म्यांमार तथा अन्य देशों से आयात अब भी जारी है।
सरकार ने तुवर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया है। इससे भारतीय आयातक एवं विदेशी निर्यातक निश्चिंत हो गए हैं।
म्यांमार में नए माल के आने से तुवर की उपलब्धता बढ़ गई है। अप्रैल में म्यांमार से भारत को 42 हजार टन से कुछ अधिक तुवर का निर्यात किया गया। अफ्रीकी देशों में अरहर (तुवर) की बिजाई लगभग समाप्त हो चुकी है और अगस्त-सितम्बर से उसकी कटाई-तैयारी आरंभ हो जाएगी।
केन्द्र सरकार पहले ही तुवर की 100 प्रतिशत अधिशेष मात्रा की खरीद का संकल्प व्यक्त कर चुकी है। नैफेड तथा एनसीसीएफ जैसी सरकारी एजेंसियां किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अधिक से अधिक मात्रा में तुवर खरीदने का प्रयास कर रही है।
भारत में अगले महीने से तुवर की बिजाई आरंभ हो जाएगी जबकि फसल की कटाई-तैयारी दिसम्बर-जनवरी में शुरू होगी। सरकारी खरीद के बावजूद तुवर के दाम में जोरदार इजाफा होना मुश्किल लगता है।
