तुवर की बढ़ती सरकारी खरीद: बाजार में पड़ेगा गहरा असर

01-May-2025 07:06 PM

तुवर की बढ़ती सरकारी खरीद: बाजार में पड़ेगा गहरा असर

30 अप्रैल 2025 तक NAFED और NCCF द्वारा संयुक्त रूप से 4.59 लाख मीट्रिक टन तुवर की खरीद मूल्य समर्थन योजना (MSP) के तहत की गई है। यह खरीद बाजार में कीमतें MSP से नीचे आने और कर्नाटक में बोनस की घोषणा के कारण हो पाई। 

तुवर खरीद का सफर: MSP और मात्रा में बड़ा उतार-चढ़ाव

वर्ष 2012-13 में ₹3850 के MSP पर मात्र 16,000 मीट्रिक टन की खरीद हुई थी।

2013-14 में यह बढ़कर 42,000 मीट्रिक टन पहुंची, जबकि MSP ₹4300 था।

2014-15 में गिरावट देखी गई और खरीद 1,000 मीट्रिक टन से भी कम रही।

2016 में MSP के साथ ₹425 बोनस जोड़कर कुल ₹5050 समर्थन मूल्य तय हुआ और 1.96 लाख मीट्रिक टन की खरीद दर्ज की गई।

2017 में ₹5250 MSP और ₹200 बोनस के साथ खरीद ने नया रिकॉर्ड बनाया और 6 लाख मीट्रिक टन से अधिक पहुंच गई।

2018 और 2019 में भी क्रमशः 2.75 लाख और 5.36 लाख मीट्रिक टन की उल्लेखनीय खरीद दर्ज हुई।

2020 और 2021 में MSP क्रमशः ₹6000 और ₹6300 कर दिया गया, लेकिन बाजार भाव MSP से ऊपर रहने के कारण खरीद कम हुई।

2025 की अब तक की खरीद देश की दूसरी सबसे बड़ी तुवर खरीद मानी जा रही है। सरकार इस भंडार का उपयोग भविष्य में कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए करेगी, जैसा कि पहले चना और मसूर में किया गया था।

एक ओर उत्पादन अच्छा है, तो दूसरी ओर आयात में भी वृद्धि देखी जा रही है। सरकारी स्टॉक भी बढ़ा आने वाले महीनों में बाजारों में सरकारी हस्तक्षेप की भूमिका अहम हो सकती है। रिकॉर्ड सरकारी खरीद आने वाले समय में न केवल कीमतों को नियंत्रित करेगी।

यदि सरकार वास्तव में दलहन उत्पादन को स्थिर और लाभकारी बनाना चाहती है, तो तुरंत नीति स्तर पर हस्तक्षेप करना होगा।

किसानों को लाभ और बाजार में संतुलन बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक रणनीति आवश्यक है।