तुवर की कीमतों में आगे और नरमी की संभावना क्षीण
13-Aug-2025 06:17 PM
मुम्बई। घरेलू प्रभाग में अरहर (तुवर) का भाव पहले ही घटकर काफी नीचे आ चुका है इसलिए निकट भविष्य में इसमें और गिरावट आने की संभावना बहुत कम है। इसका औसत मूल्य 6200/6250 रुपए प्रति क्विंटल से कुछ ऊपर चल रहा है।
घरेलू मंडियों में इसकी आपूर्ति की गति धीमी पड़ गई है और बाजार मुख्यतः म्यांमार से होने वाले आयात पर निर्भर है। अक्टूबर तक लगभग वही स्थिति रहेगी।
अफ्रीकी देशों से तुवर के नए माल का आयात अक्टूबर में ही भारत में पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यदि सस्ते माल का भारी और नियमित आयात हुआ तो तुवर के दाम पर दबाव बढ़ सकता है।
इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के अनुसार पिछले सप्ताह तुवर का भाव महाराष्ट्र के सोलापुर में 50 रुपए सुधरकर 6400/6800 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा मगर दिल्ली में 100 रुपए गिरकर 6800/6850 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया।
तुवर का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से पीछे चल रहा है जबकि इसकी बिजाई का आदर्श समय लगभग समाप्त हो चुका है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 8 अगस्त 2025 तक राष्ट्रीय स्तर पर इस महत्वपूर्ण दलहन फसल का बिजाई क्षेत्र 40.86 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका
जो पिछले साल की समान अवधि के उत्पादन क्षेत्र 42.87 लाख हेक्टेयर से 2.01 लाख हेक्टेयर तथा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 44.71 लाख हेक्टेयर से करीब 4 लाख हेक्टेयर पीछे है।
बिजाई क्षेत्र में गिरावट आने का घरेलू बाजार भाव पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ सकता है। यह देखना आवश्यक होगा कि अफ्रीकी देशों में तुवर का बाजार किस तरह की हरकत करता है।
यदि वहां भाव नीचे रहा तो भारत में सस्ता आयात जारी रहेगा और तब कीमतों में जोरदार तेजी की संभावना कम रहेगी। भारत में 31 मार्च 2026 तक तुवर का नियंत्रण मुक्त आयात करने की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है।
केन्द्र सरकार के पास भी इसका अच्छा स्टॉक मौजूद है। 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में सरकारी एजेंसियों द्वारा लगभग 6 लाख टन तुवर की खरीद की गई।
अगले कुछ सप्ताहों तक तुवर की कीमतों में थोड़ा-बहुत सुधार आ सकता है लेकिन ज्यादा लम्बी तेजी की उम्मीद नहीं की जा सकती है क्योंकि अफ्रीकी देशों में उत्पादन सामान्य या बेहतर होने के आसार हैं।
