तुवर की सरकारी खरीद में अच्छी बढ़ोत्तरी होने के संकेत
02-May-2025 11:36 AM
नई दिल्ली। दो केन्द्रीय एजेंसियों- भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नैफेड) तथा भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) द्वारा मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर तुवर की अच्छी खरीद की जा रही है।
तुवर का न्यूनतम समर्थन मूल्य इस बार 7550 रुपए प्रति क्विंटल नियत है जबकि प्रमुख उत्पादक राज्यों की थोक मंडियों में भाव घटकर इससे नीचे आ गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चालू वर्ष के दौरान 30 अप्रैल तक सरकारी एजेंसियों द्वारा करीब 4.60 लाख टन तुवर की खरीद की जा चुकी थी। कर्नाटक में तुवर की खरीद पर किसानों को अतिरिक्त बोनस देने की घोषणा की गई है जिससे उसे राहत मिल रही है।
पिछले एक दशक से अधिक समय से सरकारी स्तर पर तुवर की सीमित खरीद होती रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2012-13 के सीजन में 16 हजार टन, 2013-14 में 42 हजार टन, 2014-15 में एक हजार टन से भी कम तुवर की सरकारी खरीद हुई थी
2016 में 4625 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊपर 425 रुपए का अतिरिक्त बोनस दिए जाने के कारण खरीद की मात्रा बढ़कर 1.96 लाख टन और वर्ष 2017 में 5250 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर 200 रुपए का बोनस दिए जाने से खरीद की मात्रा उछलकर 6 लाख टन से भी ऊपर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
वर्ष 2018 एवं 2019 में भी तुवर की अच्छी खरीदारी हुई। सरकारी एजेंसियों ने 2018 में 2.75 लाख टन तथा 2019 में 5.36 लाख टन तुवर की खरीद की थी।
हालांकि तुवर का एमएसपी बढ़ाकर वर्ष 2020 में 6000 रुपए तथा 2021 में 6300 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया मगर मंडी भाव इससे ऊपर रहने के कारण सरकारी एजेंसियों को इसकी खरीद करने में ज्यादा सफलता नहीं मिली। वर्ष 2022 से 2024 तक भी लगभग यही स्थिति बनी रही।
लेकिन वर्ष 2025 में तुवर की सरकारी खरीद शानदार ढंग से हो रही है और इसकी मात्रा अब तक 4.60 लाख टन पर पहुंच चुकी है। यह खरीद घरेलू बाजार के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।
सरकार ने इस बार नौ राज्यों में कुल 13.22 लाख टन तुवर की खरीद की स्वीकृति प्रदान की है। आगामी समय में घरेलू प्रभाग में तुवर की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनाने तथा कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने में यह स्टॉक काफी मददगार साबित होगा।
