थाईलैंड से चावल का निर्यात घटने पर भारत को होगा फायदा

31-Dec-2025 05:09 PM

हैदराबाद। थाईलैंड के वाणिज्य मंत्रालय एवं चावल निर्यातक संगठन ने वर्ष 2025 की तुलना में 2026 के दौरान चावल के निर्यात में 10 प्रतिशत से कुछ अधिक की गिरावट आने का अनुमान लगाया है।

वर्ष 2025 में थाईलैंड से करीब 79-80 लाख टन चावल का निर्यात होने की संभावना है जो अगले साल यानी वर्ष 2026 में घटकर 70 लाख टन के करीब अटक सकता है।

हालांकि परम्परागत रूप से थाईलैंड दुनिया में भारत के बाद चावल का दूसरा सबसे प्रमुख निर्यातक देश माना जाता है लेकिन यदि वर्ष 2026 में वहां से इसका कुल शिपमेंट घटकर 70 लाख टन के आसपास सिमटता है तो वियतनाम उससे आगे निकल कर दूसरे स्थान पर पहुंच सकता है जो अभी तीसरे नंबर पर है। 

जहां तक भारत का सवाल है तो इसकी पोजीशन में तो कोई बदलाव नहीं होगा और यह थाईलैंड तथा वियतनाम से विशाल अंतर के साथ नंबर वन की पोजीशन पर बरकरार रहेगा लेकिन इसे चावल का निर्यात बढ़ाने का कुछ और अवसर प्राप्त हो सकता है।

भारत में रिकॉर्ड उत्पादन के कारण चावल का भारी-भरकम निर्यात योगय स्टॉक मौजूद है जबकि भारतीय मुद्रा की विनिमय दर भी आयातकों के लिए आकर्षक स्तर पर बनी हुई है। इसकी तुलना में थाईलैंड की मुद्रा 10-20 प्रतिशत मजबूत देखी जा रही है। 

थाईलैंड को चीन से काफी उम्मीदें है। दोनों देशों के बीच सरकारी स्तर पर 5 लाख टन चावल के आयात-निर्यात का करार होने की संभावना है।

थाईलैंड के चावल निर्यातकों का ध्यान कुछ अन्य देशों पर भी केन्द्रित है जिसमें इराक, सऊदी अरब, कुवैत, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, अमरीका तथा सिंगापुर आदि शामिल हैं।

अफ्रीकी देशों में थाईलैंड तथा वियतनाम के भारत की अत्यन्त कठिन चुनौती का सामना करना पड़ेगा क्योंकि सस्ता भारतीय चावल इन देशों में अपनी जगह पहले ही बहुत मजबूत कर चुका है।