दक्षिण भारत में कुल वर्षा सामान्य औसत से ज्यादा
22-Aug-2025 03:21 PM
तिरुअनन्तपुरम। शुरूआती बढ़त के बाद दक्षिण भारत में वर्षा का अभाव हो गया था और खासकर आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना में इसकी कमी महसूस की जा रही थी लेकिन पिछले दो सप्ताहों के दौरान रुक-रूककर हुई बारिश ने न केवल इस कमी को पूरा कर दिया बल्कि कुल बारिश का स्तर भी बढ़कर सामान्य औसत से ऊपर पहुंच गया।
मौसम विभाग का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन की शेष अवधि में वहां सामान्य औसत से अधिक बारिश हो सकती है। इससे न केवल खरीफ फसलों की बिजाई की रफ्तार बढ़ाने में सहायता मिलेगी बल्कि पहले बोई गई फसलों का बेहतर विकास भी संभव हो सकेगा।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की दीर्घकालीन भविष्यवाणी के अनुसार अगस्त- सितम्बर के दौरान दक्षिण भारत के अधिकांश भागों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा हो सकती है लेकिन तटीय कर्नाटक एवं केरल के कुछ भागों में बारिश का अभाव हो सकता है।
उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि 1 जून से 21 अगस्त के बीच देश के दक्षिणी- प्रायद्वीप में कुल 542.9 मि०मी० वर्षा हुई जो सामान्य औसत से 9 प्रतिशत अधिक रही।
जुलाई से वहां दीर्घकालीन औसत से 2 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। इससे पूर्व-जून में भी सामान्य औसत से 3 प्रतिशत कम पानी 156.7 मि०मी० वर्षा दर्ज की गई थी।
इतना ही नहीं बल्कि अगस्त की शुरुआत तक दक्षिण भारत में वर्षा की कमी का सिलसिला जारी रहा। 31 जुलाई से 6 अगस्त के बीच वहां सामान्य औसत से 19 प्रतिशत कम बारिश हुई लेकिन उसके बाद मानसून की सक्रियता बढ़ गई।
इसके बाद 7 से 13 अगस्त वाले सप्ताह के दौरान दक्षिण भारत में सामान्य औसत से 41 प्रतिशत तथा 14 से 20 अगस्त वाले सप्ताह में 95 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। इससे किसानों को खरीफ फसलों की बिजाई की गति को तेज करने का अच्छा अवसर मिल गया।
शुरूआती दौर में 30 जून तक आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं केरल में सामान्य के कम तथा कर्नाटक एवं तमिलनाडु में सामान्य औसत से ऊपर पहुंच गई है।
हैदराबाद मौसम कार्यालय के अनुसार तेलंगाना में कुल वर्षा सामान्य औसत से ज्यादा होने की उम्मीद है। हालांकि पिछले 45 दिनों के दौरान आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं मध्य प्रदेश के कुछ भागों में वर्षा का असमान वितरण देखा गया मगर बंगाल की खाड़ी में बन रहा सिस्टम वहां वर्षा का दायरा बढ़ाने में सहायक साबित होगा।
