दलहनों के आयात पर देश की निर्भरता बढ़कर 24.5 प्रतिशत से ऊपर पहुंची

29-Jan-2025 01:35 PM

नई दिल्ली । पिछले दो साल के दौरान देश से दलहनों के आयात में जारी बढ़ोत्तरी हुई। तुवर, उड़द एवं मसूर का आयात तो पहले से ही शुल्क मुक्त था जबकि सरकार ने दिसम्बर 2023 में पीली मटर तथा मई 2024 में देसी चना के आयात को भी शुल्क मुक्त कर दिया।

उसके फलस्वरूप वर्ष 2024 में दलहनों का कुल आयात तेजी से उछलकर 66.33 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान है। 

वर्ष 2024 में करीब 270 लाख टन दलहनों की घरेलू खपत होने का अनुमान है जिसमें 66.33 लाख टन का आयातित दलहन भी शामिल है।

इस तरह दलहनों की लगभग 24.57 प्रतिशत घरेलू मांग एवं जरूरत को आयात के जरिए पूरा किया गया। मासिक आधार पर देखा जाए तो देश में प्रति माह करीब 22.50 लाख टन दलहनों की औसत खपत हुई जिसमें आयातित दलहनों की भागीदारी 5.53 लाख टन या 24.57 प्रतिशत रही।  

देश में लगभग 3-4 माह की मांग एवं खपत के समतुल्य दलहनों का आयात किया गया जो सचमुच गंभीर चिंता की बात है।

सरकार की उदारवादी नीति के कारण आयात में तेजी से जबरदस्त इजाफा हुआ है। चूंकि यह नीति आगे भी बरकरार रहने की उम्मीद है जिसका संकेत तुवर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा में हुई एक साल की वृद्धि से मिलता है इसलिए वर्ष 2025 में भी दलहनों का विशाल आयात होना संभव है।

भारत में मुख्यतः पीली मटर, अरहर (तुवर), मसूर, उड़द एवं देसी चना का शुल्क मुक्त आयात किया जा रहा है। रिकॉर्ड आयात के कारण घरेलू प्रभाग में दाल-दलहन की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है और बाजार नरमी की चपेट में आ गया लगता है।