दलहनों के बढ़ते आयात पर अंकुश लगाना आवश्यक

25-Apr-2025 08:16 PM

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान मात्रा और मूल्य की दृष्टि से दलहनों का आयात बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। घरेलू उत्पादन में कमी आने तथा बाजार भाव ऊंचा रहने के कारण सरकार को पांचों प्रमुख दलहन- तुवर, उड़द, देसी चना एवं पीली मटर के आयात को पूरी तरह शुल्क मुक्त करने के लिए विवश होना पड़ा।

देसी चना एवं पीली मटर पर पहले भारी-भरकम आयात शुल्क लगा हुआ था जिसे एक झटके में समाप्त कर दिया गया। इसके फलस्वरूप जहां पीली मटर का विशाल आयात हुआ वहीं देसी चना का आयात उछलकर सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। निर्यातक देशों ने भारत की स्थिति का भरपूर फायदा उठाते हुए दलहनों का भाव ऊंचा कर दिया। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दलहनों का आयात खर्च वित्त वर्ष 2023-24 के 3.74 अरब डॉलर से 46 प्रतिशत उछलकर 2024-25 में 5.47 अरब डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

इसी तरह दलहनों के आयात की मात्रा भी इस अवधि में 44 लाख टन से उछलकर 67 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान है। विशाल आयात को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा फिलहाल कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है जबकि रबी कालीन फसलों की जोरदार आवक हो रही है और खरीफ कालीन दलहन फसलों की बिजाई जून में आरंभ होने वाली है।