दलहनों के बिजाई क्षेत्र में 90 हजार हेक्टेयर की वृद्धि

30-Sep-2025 03:11 PM

नई दिल्ली। कमजोर बाजार मूल्य एवं विदेशों से हो रहे बेतहाशा सस्ते आयात के कारण इस बार दलहनों की खेती में भारतीय किसानो द्वारा ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया गया।

इसके फलस्वरूप तुवर, मूंग एवं मोठ की बिजाई गत वर्ष से पीछे रह गई और केवल उड़द के रकबे में सुधार देखा गया। कुल्थी की बिजाई भी थोड़ी बढ़ी है दलहनों की बिजाई समाप्त हो चुकी है।

अधिकारी आंकड़ों के अनुसार खरीफ कालीन दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 118.95 लाख हेक्टेयर से सुधरकर इस बार 119.85 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया इसके तहत अरहर (तुवर) का बिजाई क्षेत्र 46.39 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 46.31 लाख हेक्टेयर तथा मूंग का रकबा 34.96 लाख हेक्टेयर से गिरकर 34.84 लाख हेक्टेयर पर अटक गया

दूसरी ओर कुल्थी का उत्पादन क्षेत्र 56 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 67 हजार हेक्टेयर और उड़द का बिजाई क्षेत्र 22.87  लाख हेक्टेयर से बढ़कर 24.29 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। मोठ की बिजाई में थोड़ी कमी आई जबकि अन्य दलहनों का क्षेत्र भी 4.55 लाख हेक्टेयर से गिरकर 4.51 लाख हेक्टेयर रह गया।       

कुछ महत्वपूर्ण उत्पादक राज्यों में भारी वर्षा एवं बाढ़ से दलहन फसलों का नुकसान हुआ है। राजस्थान में मूंग तथा मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र में उड़द की फसल प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुई है। इन दोनों दलहनों की अगैती बिजाई वाली नई फसल की कटाई-तैयारी शुरू हो गई है कहीं-कहीं इसकी क्वालिटी कमजोर बताई जा रही है। इसलिए फसलों पर खतरा भी बरकरार है। 

विदेशों से तुवर, उड़द एवं पीली मटर का शुल्क मुक्त आयात जारी रहने से घरेलू प्रभाग में दलहनों के दाम पर दबाव देखा जा रहा है। चना और मसूर पर भी 10-10 प्रतिशत का ही आयात लगाने की जोरदार मांग हो रही है लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इस संबंध में सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक निर्णय दीपावली के बाद ही लिया जा सकता है।