दलहन-तिलहन के उत्पादन में अनेक चुनौतियां बरकरार

05-Jan-2026 12:35 PM

नई दिल्ली। आंकड़ों के आधार पर भारत दुनिया में दलहनों का सबसे प्रमुख तथा तिलहनों का पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक देश है

लेकिन कुल वार्षिक घरेलू मांग एवं जरूरत से काफी कम होने के कारण यह दलहनों एवं खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश भी बना हुआ है। इसके आयात पर भारत को प्रति वर्ष अरबों डॉलर खर्च करने पड़ते हैं जिससे राष्ट्रीय अर्थ व्यवस्था पर दबाव पड़ता है। 

भारत में दलहन-तिलहन फसलों की खेती में किसानों को कई चुनौतियों एवं समस्याओं का सामना करना पड़ता है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने इस पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यद्यपि अन्य जिंसों के उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है लेकिन दलहन-तिलहन फसलों की पैदावार बढ़ाने की दिशा में अभी बहुत बड़े पैमाने पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

देश में दलहनों एवं तिलहनों की प्रति हेक्टेयर औसत उपज दर काफी नीचे है और खासकर सोयाबीन एक चुनौतीपूर्ण फसल के रूप में उभर रही है।

इस महत्वपूर्ण तिलहन फसल के बिजाई क्षेत्र में काफी गिरावट आ गई है क्योंकि इसके अनेक परम्परागत उत्पादक अब मक्का जैसी फसलों की तरफ आकर्षित हो गए हैं। 

2023-24 सीजन के दौरान खाद्य तेलों का घरेलू उत्पादन 121.80 लाख टन दर्ज किया गया लेकिन यह कुल मांग एवं जरूरत का 44 प्रतिशत ही था। शेष 56 प्रतिशत खाद्य तेलों की जरूरत को विदेशों से आयात के जरिए पूरा किया गया।

लेकिन विदेशी खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता 2015-16 सीजन के 63.20 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 56.25 पर आ गई।

दलहनों का आयात कुछ वर्ष तक धीमा रहने के बाद अब पुनः बढ़ने लगा है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह उछलकर सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। 2025-26 में इसमें काफी गिरावट आने की संभावना है। लेकिन फिर भी आयात का स्तर ऊंचा ही रहेगा। 

तिलहन एवं दलहन फसलों की खेती के प्रति किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा जोरदार प्रयास किया जा रहा है। सरकार द्वारा पिछले दिन दलहनों के छह तथा तिलहनों की 13 नई उन्नत किस्मों को व्यावसायिक खेती के लिए जारी किया गया।