दलहन-तिलहनों में नरमी से खाद्य महंगाई घटने की संभावना लेकिन आगे जोखिम बरकरार
27-Jan-2025 11:03 AM
नई दिल्ली । उद्योग-व्यापार क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि दलहन (दालों) एवं तिलहन (खाद्य तेलों) का भाव नरम पड़ने से निकट भविष्य में खाद्य महंगाई की दर में कुछ कमी आ सकती है लेकिन गेहूं का दाम नीचे नहीं आ रहा है और चीनी की कीमत बढ़ गई है जिससे महंगाई का खतरा आगे बरकरार रह सकता है।
जानकारी के मुताबिक रबी फसलों की बिजाई में कुछ सुधार आया है, मौसम की हालत अनुकूल बनी हुई है और उत्पादन कुछ बेहतर होने की उम्मीद है। इसके फलस्वरूप अगले तीन-चार महीनों के दौरान खाद्य महंगाई में वर्तमान स्तर के मुकाबले गिरावट आने के आसार हैं।
लेकिन अनाजों एवं खाद्य तेलों का दाम अब भी ऊंचे स्तर बरकरार है। अप्रैल से दिसम्बर 2024 के दौरान उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक का औसत 8.4 प्रतिशत दर्ज किया गया जो जनवरी-मार्च 2025 की तिमाही में घटकर 6 प्रतिशत के आसपास आ सकता है और इसके अनुरूप कुल महंगाई दर भी घटकर 5 प्रतिशत से नीचे आ सकती है।
लेकिन महंगाई के इससे नीचे जाने की संभावना बहुत कम है। इसका मतलब यह हुआ कि वित्त वर्ष 2024-25 की सम्पूर्ण अवधि (अप्रैल-मार्च) के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 4.8 से 5.0 प्रतिशत के बीच रह सकता है जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुमान से 30-50 आधार बिंदु ज्यादा है।
हाल के महीनों में खरीफ कालीन फसलों की नई आवक होने तथा विदेशों से खाद्य तेलों एवं दलहनों का आयात जारी रहने से खाद्य उत्पादों की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है। रबी सीजन में तिलहनों का रकबा करीब 4 प्रतिशत घट गया है जिससे खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता में वृद्धि हो सकती है।
दलहनों का घरेलू उत्पादन भी घरेलू मांग एवं जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा गेहूं पर सबका ध्यान केन्द्रित है जिसकी खुदरा महंगाई दर जनवरी 2024 के 2.31 प्रतिशत से उछलकर दिसम्बर 2024 में 7.84 प्रतिशत पर पहुंच गई।
चावल की कीमतों में काफी हद तक स्थिरता बनी हुई है। सरकार तथा व्यापारियों के पास गेहूं का कम स्टॉक बचा हुआ है।
