उर्वरकों का स्टॉक कम होने से खरीफ सीजन में बढ़ सकती है समस्या
25-Apr-2025 11:09 AM
नई दिल्ली। चालू माह के आरंभ में भारत में उर्वरकों का स्टॉक घट कर पिछले तीन साल के निचले स्तर पर आ गया जिससे आगामी खरीफ सीजन के दौरान इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता का संकट बढ़ सकता है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान घरेलू प्रभाग में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में 9 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।
किसानों को समुचित मात्रा में उचित मूल्य पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार के लिए एक कठिन चुनौती होगी। खरीफ सीजन में धान, दलहन, तिलहन, मोटे अनाज एवं कपास आदि फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है और इसलिए उर्वरकों की ज्यादा जरूरत पड़ती है।
जून से खरीफ फसलों की रोपाई / बिजाई आरंभ होने वाली है। वर्ष 2024 के खरीफ सीजन में उर्वरकों की जितनी वास्तविक बिक्री हुई थी उसके मुकाबले 2025 के खरीफ सीजन में इसकी मांग 3 प्रतिशत अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
चालू वर्ष के दौरान भारत में खरीफ सीजन में रासायनिक उर्वरकों की कुल मांग बढ़कर 330.03 लाख टन पर पहुंचने की संभावना है जिसमें 185.40 लाख टन यूरिया, करीब 57 लाख टन डीएपी 11.13 लाख टन एमओपी तथा 76.51 लाख कॉम्प्लैक्स (सभी पोषण तत्वों का समूह) शामिल है।
खरीफ 2024 के दौरान लगभग 320 लाख टन रासायनिक उर्वरकों की वास्तविक बिक्री हुई थी जिसके मुकाबले इस बार मांग 3.2 प्रतिशत ज्यादा रहने की उम्मीद है।
हालांकि केन्द्र सरकार रासायनिक उर्वरकों की मांग एवं खपत घटाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है लेकिन इसके बावजूद इसका उपयोग बढ़ता जा रहा है। 1 अप्रैल 2025 को देश में केवल 107.98 लाख टन उर्वरकों का स्टॉक बचा हुआ था जो 1 अप्रैल 2024 को उपलब्ध स्टॉक 144.10 लाख टन से करीब 25 प्रतिशत कम था। वह स्टॉक 2023 की तुलना में भी कम रहा।
इससे पूर्व वर्ष 2022 में इसका स्टॉक 71.08 लाख टन दर्ज किया गया था। यद्यपि घरेलू उत्पादन के साथ-साथ विदेशों से भी उर्वरकों का आयात हो रहा है लेकिन समय बहुत कम रह गया है।
कुछ राज्यों में कपास की बिजाई आरंभ हो चुकी है जबकि अन्य खरीफ फसलों की बिजाई जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून की पहली बारिश के साथ शुरू होगी और तब तक उर्वरकों को पर्याप्त स्टॉक का प्रबंध करना आसान नहीं होगा।
