उत्तर प्रदेश में गत 8 वर्षों के दौरान दलहन-तिलहन के उत्पादन में शानदार बढ़ोत्तरी

20-May-2025 03:46 PM

लखनऊ। देश के सबसे प्रमुख खाद्यान्न उत्पादक राज्य- उत्तर प्रदेश में हाल के वर्षों में दलहन एवं तिलहन फसलों की पैदावार में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले 8 वर्षों के दौरान राज्य में दलहनों का कुल उत्पादन 23.95 लाख टन से लगभग ढाई गुना उछलकर 59.19 लाख टन तथा तिलहनों का उत्पादन 12.40 लाख टन से दोगुने से ज्यादा बढ़कर 29.20 लाख टन की ऊंचाई पर पहुंच गया।

इसके साथ ही उत्तर प्रदेश दलहनों एवं तिलहन के उत्पादन में आत्मनिर्भरता के काफी करीब पहुंच गया है। राज्य सरकार इन दोनों संवर्ग की फसलों की औसत उपज दर एवं पैदावार बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास कर रही है। 

उत्तर प्रदेश मटर का सबसे प्रमुख तथा मसूर एवं सरसों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। इसके अलावा वहां चना, तुवर, उड़द, मूंग तथा मूंगफली अदि दलहन-तिलहन का भी अच्छा उत्पादन होता है। दलहन-तिलहन फसलों के रकबे में नियमित रूप से बढ़ोत्तरी हो रही है।  

सरकार ने कई ऐसे प्रोत्साहन कदम उठाए हैं जिससे दलहन-तिलहन की खेती के प्रति किसानों का आकर्षण बढ़ता जा रहा है। राज्य में किसानों को उड़द, अरहर (तुवर), मूंग एवं चना जैसे दलहनों की उच्च उत्पादकता वाले बीजों का मुफ्त वितरण किया जा रहा है।

वहां 46.33 लाख मिनी किट्स का स्टॉक रखा जाता है और किसान पाठशालाओं के माध्यम से उत्पादकों को प्रशिक्षण  दिया जाता है।  राज्य के अलग-अलग भागों में कृषि मेले का आयोजन किया जाता है और किसानों को गन्ना के खेतों में दलहन उगाने की तरकीब बताई जाती है।

यह अंतर्फसलीय कृषि पद्धति काफी उपयोगी साबित हो रही है और किसानों की आमदनी बढ़ा रही है। कृषि विभाग खेती की नई-नई विधियों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है।

ड्रिप सिंचाई पर जोर देते हुए खेतों की मेड़ के पास या किनारे-किनारे में दलहन-तिलहन फसलों को बोने की विधि भी किसानों को बताई जाती है।  

उत्तर प्रदेश में 2026-27 के सीजन तक दलहनों का उत्पादन क्षेत्र बढ़ाकर 28.84 लाख हेक्टेयर और तिलहनों का बिजाई क्षेत्र बढ़ाकर 22.63 लाख हेक्टेयर पर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है ताकि स्वदेसी स्रोतों से इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता में अच्छी बढ़ोत्तरी सुनिश्चित हो सके।