उत्तर प्रदेश से चीनी का निर्यात 40 प्रतिशत तक घटने की संभावना
28-Apr-2025 04:41 PM
लखनऊ। महाराष्ट्र को पीछे छोड़कर उत्तर प्रदेश इस बार देश में चीनी का सबसे अग्रणी उत्पादक राज्य बन गया है लेकिन फिर भी वहां कुल उत्पादन गत वर्ष से कम होने की संभावना है।
2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में राज्य से चीनी के निर्यात में भी लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार सरकार ने पूरे मार्केटिंग सीजन के लिए कुल 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है जबकि वास्तविक शिपमेंट 6-7 लाख टन सिमटने के आसार हैं।
इसमें उत्तर प्रदेश की भागीदारी 3 लाख टन के करीब रह सकती है। 2022-23 सीजन की तुलना में यह हिस्सेदारी काफी कम है। इस समय राज्य से करीब 5 लाख टन चीनी का निर्यात हुआ था।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 2023-24 के मार्केटिंग सीजन में चीनी के निर्यात की स्वीकृति नहीं दी थी क्योंकि घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता घटने तथा कीमत बढ़ने से विषम स्थिति पैदा हो गई थी।
उद्योग द्वारा बार-बार आग्रह किए जाने के बावजूद सरकार ने चीनी के निर्यात की मंजूरी देने से इंकार कर दिया था। इससे पूर्व 2021-22 के सीजन में देश से चीनी का निर्यात तेजी से बढ़कर 110 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था।
उद्योग विश्लेषकों के मुताबिक दक्षिण- पूर्व एशिया तथा अफ्रीका के देशों में इस बार भारत से चीनी का जितना निर्यात होगा उसमें उत्तर प्रदेश का योगदान 50 प्रतिशत के आसपास रह सकता है। महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में चीनी के उत्पादन में भारी गिरावट आई है।
उत्तर प्रदेश के उत्पादन में अपेक्षाकृत कम गिरावट आई है। उद्योग ने सरकार से 10 लाख टन चीनी के निर्यात की इजाजत मांगी थी जिसकी स्वीकृति भी मिल गई लेकिन घरेलू बाजार भाव ऊंचा होने पर ही भारत से चीनी के निर्यात का प्रदर्शन सुधर सकता है।
उत्तर प्रदेश में 2024-25 के वर्तमान गन्ना क्रशिंग सीजन में चीनी का कुल उत्पादन 92 लाख टन के आसपास सिमटने का अनुमान लगाया जा रहा है क्योंकि अन्य राज्यों की भांति वहां भी गन्ना की औसत उपज दर एवं चीनी की रिकवरी दर में कमी आई है।
