उत्तरी राज्यों की मंडियों में कपास की आपूर्ति में 43 प्रतिशत की भारी गिरावट
13-Dec-2024 07:50 PM
भटिंडा । उत्तरी भारत के तीनों प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों- पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान की मंडियों में वर्तमान मार्केटिंग सीजन के दौरान 30 नवम्बर 2024 तक कपास की कुल आवक पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 43 प्रतिशत कम हुई। इससे सम्पूर्ण आपूर्ति श्रृंखला के लिए समस्या और चिंता बढ़ गई।
कुछ उत्पादक आगामी समय में दाम बढ़ने की उम्मीद से कपास का स्टॉक अपने पास रोकने का प्रयास कर रहे हैं जबकि जिनिंग- प्रोसेसिंग इकाइयों को खासकर पंजाब में कच्चे माल (कपास) के भारी अभाव का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि इन प्रांतों में कपास की आपूर्ति का सीजन अभी जारी है मगर विशेषज्ञों का कहना है कि बिजाई क्षेत्र में भारी गिरावट एवं कमजोर उत्पादकता के कारण वहां कपास के उत्पादन में भारी कमी आने की संभावना है। किसान अपने स्टॉक की बिक्री में देर कर रहे हैं क्योंकि उन्हें आगामी महीनों में कपास का भाव ऊंचा होने का भरोसा है।
वर्तमान समय में कपास का दाम नीचे में 6250 रुपए से लेकर ऊपर में 8340 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है जबकि इसका अधिकांश करोबार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास वाले दाम पर हो रहा है।
यद्यपि उत्तरी राज्यों में भी कपास के नए माल की आवक का सीजन अक्टूबर से शुरू होकर अगले साल सितम्बर में समाप्त होता है मगर वहां मंडियों में अधिकांश कपास की आवक अक्टूबर से दिसम्बर के बीच हो जाती है।
पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में अप्रैल-मई में कपास की अगैती बिजाई होती है इसलिए अक्सर वहां सितम्बर से ही इसकी नई फसल आने लगती है।
चालू मार्केटिंग सीजन में 30 नवम्बर तक इन राज्यों की मंडियों में केवल करीब 54 लाख क्विंटल कपास की आवक हुई जो लगभग 9.75 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) रूई (बिनौला रहित कपास) के समतुल्य है। इसके मुकाबले पिछले साल की समान अवधि में वहां 86.15 लाख क्विंटल कपास या 17.23 लाख गांठ रूई की आवक हुई थी।
