ऊंचे बाजार भाव के बावजूद सरकार को गेहूं की अच्छी खरीद होने का भरोसा

29-Jan-2025 11:52 AM

नई दिल्ली । हालांकि खुले बाजार में गेहूं का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी ऊंचा चल रहा है लेकिन इसके बावजूद सरकार को चालू वर्ष के रबी मार्केटिंग सीजन के दौरान इस सर्वाधिक महत्वपूर्ण खाद्यान्न की खरीद में अच्छी सफलता मिलने की उम्मीद है। सरकार का यह भरोसा 2023-24 की खरीद पर आधारित है।

2022-23 की तुलना में गेहूं का भाव 2023-24 के सीजन में 17 प्रतिशत ऊपर चल रहा था मगर फिर भी खरीद में गिरावट नहीं आई। वर्ष 2022 में गेहूं की सरकारी खरीद घटकर 188 लाख टन पर अटक आई थी जो पिछले 16 वर्षों में सबसे कम रही थी।

इसके बाद 2023 में गेहूं की खरीद करीब 40 प्रतिशत बढ़कर 262 लाख टन पहुंची तथा 2024 में कुछ और सुधरकर 266 लाख टन पर पहुंच गई।

वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जनवरी-मार्च 2023 के दौरान गेहूं में महंगाई की दर वर्तमान वृद्धि दर से काफी ऊंची रही थी लेकिन फिर भी गेहूं की सरकारी खरीद 260 लाख टन से अधिक हुई।

इस बार राजस्थान एवं मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर अतिरिक्त बोनस देने की घोषणा की गई है जिससे किसानों को सरकारी क्रय पर अपना गेहूं अधिक से अधिक मात्रा में बेचने का प्रोत्साहन मिल सकता है। 

गेहूं की खरीद बढ़ाने के प्रति सरकार काफी गंभीर है। देश के पांच प्रमुख उत्पादक राज्यों- उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान तथा गुजरात के खाद्य मंत्रियों के साथ केन्द्रीय खाद्य मंत्री दो चरणों में विचार-विमर्श कर चुके हैं।

इसी तरह गेहूं की खरीद के अनुमान (लक्ष्य) को अंतिम रूप देने तथा कार्य योजना तैयार करने के लिए केन्द्रीय खाद्य सचिव द्वारा अगले महीने सभी गेहूं उत्पादक राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मीटिंग आयोजित किए जाने की उम्मीद है। पंजाब तथा हरियाणा में आमतौर पर गेहूं की सरकारी खरीद में ज्यादा समस्या नहीं आती है। 

पिछले साल केन्द्रीय पूल के लिए कुल 266.05 लाख टन गेहूं खरीद गया जिसमें इन पांच राज्यों- उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार एवं गुजरात का संयुक्त योगदान केवल 26 प्रतिशत रहा था।

खाद्य मंत्रालय ने वर्ष 2024 में इन राज्यों में संयुक्त रूप से 162.10 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया था मगर वास्तविक खरीद लगभग 70 लाख टन या 43 प्रतिशत तक ही पहुंच सकी।