ऊंचे स्टॉक एवं कमजोर भाव से लालमिर्च के बिजाई क्षेत्र में भारी गिरावट
22-Nov-2024 12:54 PM
गुंटूर । पिछला बकाया स्टॉक ज्यादा होने तथा बाजार भाव कमजोर रहने से इस वर्ष लालमिर्च के बिजाई क्षेत्र में भारी गिरावट आ गई और कई इलाकों में किसानों ने इसका रकबा घटाकर मक्का तथा मूंग सहित अन्य आकर्षक मूल्य वाली फसलों की खेती का क्षेत्रफल बढ़ा दिया।
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना तथा कर्नाटका जैसे अग्रणी उत्पादक राज्यों में किसानों का उत्साह एवं आकर्षण इस बार लालमिर्च की खेती में काली घट गया। कोल्ड स्टोरेज में लालमिर्च का स्टॉक काफी ऊंचा बताया जा रहा है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान लालमिर्च के बिजाई क्षेत्र में करीब 25-30 प्रतिशत की भारी गिरावट आने की संभावना है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर लालमिर्च का उत्पादन क्षेत्र 2022-23 सीजन के 8.52 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2023-24 के सीजन में 9.90 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया था जबकि इसका कुल उत्पादन भी 27-82 लाख टन से उछलकर 32.08 लाख टन पर पहुंचा।
समीक्षकों के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस बार लालमिर्च का बकाया स्टॉक काफी अधिक है। केवल गुंटूर में ही इसका स्टॉक बढ़कर 42 लाख बोरी (40 किलो की प्रति बोरी) पर पहुंच गया है जबकि गत वर्ष यह 27 लाख बोरी ही था।
गुंटूर स्थित संस्था- ऑफ इंडिया चिली एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के चैयरमैन का कहना है कि लालमिर्च के बिजाई क्षेत्र में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट आई है लेकिन फसल की हालत काफी अच्छी है। तेलंगाना में लगभग 30 लाख बोरी तथा कर्नाटक में 42.50 लाख बोरी लालमिर्च का स्टॉक बताया जा रहा है।
चेयरमैन के अनुसार देश के अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों- मध्य प्रदेश, गुजरात तथा महाराष्ट्र में लालमिर्च फसल की हालत ज्यादा अच्छी नहीं है क्योंकि वहां भारी वर्षा एवं बाढ़ से इसे नुकसान हुआ है।
एक अग्रणी व्यापारी के अनुसार ब्यादगी तथा 5531 जैसी हाइब्रिड वैरायटी की लालमिर्च का क्षेत्रफल 25-30 प्रतिशत घटा है। कर्नाटक में इस वर्ष भारी स्टॉक मौजूद है
इसलिए उत्पादन में गिरावट आने के बावजूद इसकी उपलब्धता में ज्यादा कमी नहीं आएगी। कर्नाटक में ब्यादगी वैरायटी की लालमिर्च का भाव घटकर 22,000 रुपए प्रति क्विंटल के करीब आ गया है।
