ऊंचे तापमान एवं नमी के अभाव से रबी फसलों की प्रगति पर असर पड़ने की आशंका

09-Dec-2024 01:53 PM

नई दिल्ली । दक्षिणी राज्यों को छोड़कर देश के अधिकांश भागों में मध्य अक्टूबर से ही अच्छी बारिश नहीं होने तथा तापमान ऊंचा रहने से रबी फसलों की बिजाई एवं प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

इसमें गेहूं, जौ, चना, मसूर, मटर एवं सरसों आदि शामिल हैं। इन फसलों की बिजाई तो विभिन्न भागों में जारी है लेकिन वर्षा पर आश्रित क्षेत्रों में इसका भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। 

ऊंचे तापमान के कारण खेतों की मिटटी से नमी का अंश गायब होता जा रहा है जिससे कृषक समुदाय को अतिरिक्त सिंचाई की व्यवस्था करनी पड़ रही है। इससे लागत खर्च स्वाभाविक रूप से बढ़ जाएगा।

हालांकि अनेक इलाकों में ताप रोधी किस्मों में गेहूं की बिजाई का दावा किया जा रहा है मगर गर्मी को सहने की उसकी निश्चित सीमा है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि दिन और रात के उच्चतम तथा न्यूनतम तापमान की वर्तमान स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं आया और एक- दो अच्छी बारिश नहीं हुई तो गेहूं सहित कुछ अन्य फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

वैसे भी पंजाब-हरियाणा में इस बार आदर्श अवधि के बाद कई क्षेत्रों में गेहूं की बिजाई हुई है जिससे इसकी उपज दर में कमी आने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि इन दोनों प्रांतों में गेहूं को उत्पादकता अन्य राज्यों से ऊंची या बेहतर रहती है। 

रबी फसलों के बिजाई क्षेत्र में क्रमिक रूप से सुधार आ रहा है। ध्यान देने की बात है कि केवल अधिक क्षेत्रफल में होने वाली बिजाई ही बेहतर उत्पादन की गारंटी नहीं होती है बल्कि इसके लिए मौसम का अनुकूल होना तथा कीड़ों-रोगों एवं प्राकृतिक आपदाओं से फसल का मुक्त रहना भी आवश्यक होता है।

दिसम्बर से फरवरी तक का मौसम रबी फसलों के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है। मौसम विभाग ने इस अवधि में तापमान सामान्य औसत से ऊंचा रहने तथा बीच-बीच में धुंध एवं घने कोहरे का प्रकोप होने का अनुमान व्यक्त किया है जो रबी फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। 

दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्व मानसून की सक्रियता एवं फेनल नामक समुद्री चक्रवाती तूफान के कारण तमिलनाडु, पांडिचेरी, कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के कई भागों में हुई मूसलाधार वर्षा से रबी फसलों को क्षति हो सकती है।

इधर राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र एवं बिहार जैसे राज्यों में बारिश की जरूरत है।