ऊंचे तपमान से उत्तर प्रदेश में गेहूं की फसल को खतरा

13-Feb-2025 12:24 PM

लखनऊ । देश के सबसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य- उत्तर प्रदेश में चालू रबी सीजन के दौरान इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का बिजाई क्षेत्र तो लगभग सामान्य रहा है लेकिन तापमान में हो रही अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी के कारण  फसल पर संकट बढ़ता  जा रहा है।

इसके तहत खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में दिन का तापमान सामान्य स्तर से काफी ऊंचा हो गया है जिससे फसल की प्रगति में बाधा पड़ने की आशंका है हालांकि अभी स्थिति चिंताजनक स्तर तक खराब नहीं हुई है।

लेकिन अगले 15 दिनों का समय इसके लिए निर्णायक साबित हो सकता है यदि चालू माह के अंतिम सप्ताह तक एकाध बारिश हो गई अथवा तापमान में गिरावट आ गई तो फसल की हालत सुधर जाएगी और उसे ज्यादा खतरा नहीं रहेगा। 

समस्या यह है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में न्यूनतम तापमान भी 15 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है जिससे दिन और रात के तापमान में अंतर घट गया है।

इससे गेहूं की फसल का समुचित विकास नहीं हो सकेगा और पौधों का आकार छोटा रह जाएगा। उसमें बालियां कम निकलेंगी और बालियों में गेहूं के दाने की संख्या भी घट जाएगी।

गेहूं का दाना नियत समय से पूर्व ही पकने लगेगा। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक गेहूं की फसल को सामान्य हालत में आने के लिए अगले 10-15 दिनों तक न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहना आवश्यक है अन्यथा उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में मौसम की वर्तमान स्थिति के आधार पर गेहूं की औसत उपज दर में 2-3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की गिरावट आने की आशंका व्यक्त की जा रही है। 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हालत फिलहाल ज्यादा चिंताजनक नहीं है क्योंकि वहां तापमान सामान्य स्तर के आसपास या उससे कुछ नीचे चल रहा है

कृषि विभाग ने 2024-25 के मौजूदा रबी सीजन के दौरान उत्तर प्रदेश में गेहूं का कुल उत्पादन बढ़कर 322.50 लाख टन की ऊंचाई पर पहुंचने का अनुमान लगाया है जो 2023-24 सीजन के उत्पादन से 4.7 प्रतिशत अधिक है।

गेहूं के कुल राष्ट्रीय उत्पादन में उत्तर प्रदेश लगभग 25 प्रतिशत का योगदान देता है। राज्य के किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर केन्द्रीय पूल के लिए अच्छी मात्रा में गेहूं की खरीद की जाती है।