ऊंचे टैरिफ के कारण अमरीका में भारतीय बासमती चावल का निर्यात प्रभावित होने की आशंका
13-Aug-2025 11:40 AM
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष के शुरूआती चार महीनों में यानी अप्रैल-जुलाई 2025 के दौरान भारत से अमरीका को बासमती चावल का निर्यात घटकर 78 हजार टन पर सिमट गया जो पिछले साल की समान अवधि के शिपमेंट 90 हजार टन से 12 हजार टन या करीब 13 प्रतिशत कम रहा।
अगस्त 2024 में वहां 22,730 टन बासमती चावल भेजा गया था मगर अगस्त 2025 में शिपमेंट काफी घटने की संभावना है। 7 अगस्त से अमरीका में भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत का टैरिफ (सीमा शुल्क) लागू हो चुका है जबकि ट्रम्प प्रशासन ने 27 अगस्त से इसे दोगुना बढ़ाकर 50 प्रतिशत निर्धारित करने की घोषणा की है।
अमरीका को बासमती चावल का निर्यात करने वाली भारतीय कंपनियों का कहना है कि यदि 50 प्रतिशत का टैरिफ लागू हो गया तो निर्यात की गति को बरकरार रखना मुश्किल हो जाएगा। इसका सीधा फायदा पाकिस्तान को मिलेगा जिसके उत्पादों पर अमरीका में केवल 19 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाया गया है।
लेकिन भारतीय बासमती चावल के लिए चीन एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक बाजार साबित हो सकता है क्योंकि दोनों देशों में निकटता बढ़ रही है। चीन में भारत से 2023-24 में 3293 टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था
जो 2024-25 में बढ़कर 5834 टन पर पहुंच गया। ऐसी खबर आ रही है कि चीन ने अपनी कंपनियों को भारत को 3 लाख टन यूरिया बेचने की अनुमति दे दी है जबकि दोनों देशों के बीच हवाई सेवा भी जल्दी ही आरंभ होने की उम्मीद है।
दरअसल अमरीका में भारतीय बासमती चावल का निर्यात काफी ऊंचे दाम पर होता है जिससे निर्यातकों को अच्छी आमदनी प्राप्त होती है।
पिछले साल भारतीय बासमती चावल का औसत इकाई निर्यात ऑफर मूल्य ईरान के लिए 881 डॉलर प्रति टन तथा सऊदी अरब के लिए 1025 डॉलर प्रति टन रहा जबकि अमरीका के लिए यह सबसे ऊंचा 1230 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया था।
चीन के लिए भी यह औसत मूल्य 1095 डॉलर प्रति टन रहा जिसे निर्यातक काफी अच्छा मानते है। वित्त वर्ष 2024-25 की पूरी अवधि में भारत से कुल 60.70 लाख टन बासमती चावल का रिकॉर्ड निर्यात हुआ था जिसमें से 2,74,213 टन या करीब 4.5 प्रतिशत भाग का शिपमेंट अमरीका को किया गया था।
