ऊंची उपज दर के सहारे कपास का उत्पादन बेहतर होने के आसार
16-Aug-2025 01:25 PM
नई दिल्ली। हालांकि कपास का बिजाई क्षेत्र एक बार फिर घटने के संकेत मिल रहे हैं लेकिन एक अग्रणी व्यापारिक संगठन का कहना है कि इसकी औसत उपज दर में सुधार आ सकता है क्योंकि प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मौसम तथा मानसून की हालत काफी हद तक अनुकूल बनी हुई है। इसके फलस्वरूप रूई का सकल घरेलू उत्पादन बेहतर होने के आसार हैं। फसल का विकास सामान्य ढंग से हो रहा है।
शीर्ष व्यापारिक संस्था- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के अनुसार यद्यपि देश के दोनों अग्रणी उत्पादक राज्यों- गुजरात एवं महाराष्ट्र में कपास के बिजाई क्षेत्र में गिरावट आई है लेकिन फसल की हालत बहुत अच्छी है।
देश के 10 राज्यों में बीटी कॉटन की खेती होती है जबकि उड़ीसा सहित कुछ अन्य प्रांतों में परम्परागत प्रजातियों की कपास का ही उत्पादन होता है। सभी प्रमुख उत्पादक प्रांतों में इस बार अच्छी या संतोषजनक वर्षा हुई है।
वैसे राष्ट्रीय स्तर पर कपास का बिजाई क्षेत्र 3 प्रतिशत घट गया है और यह गत वर्ष के 110 लाख हेक्टेयर से गिरकर इस बार 107 लाख हेक्टेयर पर अटक गया है।
लेकिन पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान कपास की औसत उपज दर में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है जिसमें कुल उत्पादन बेहतर हो सकता है।
एसोसिएशन ने 2025-26 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर कपास का उत्पादन सुधरकर 325-330 लाख गांठ पर पहुंचने का अनुमान लगाया है।
गत वर्ष की तुलना में इस बार कपास की बिजाई 15 दिन अगैती हुई है और इसके पौधों की सामान्य प्रगति देखी जा रही है। 2024-25 के सीजन में एसोसिएशन ने 311 लाख गांठ कपास के उत्पादन का अनुमान लगाया था।
दक्षिण भारत में फसल की हालत बेहतर है। कर्नाटक में कपास का क्षेत्रफल 18-20 प्रतिशत बढ़ा है और इसे देखते हुए एसोसिएशन ने वहां उत्पादन 2024-25 के 24 लाख गांठ से बढ़कर 2025-26 के सीजन में 30 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) पर पहुंचने का अनुमान लगाया है।
इसी तरह तेलंगाना में भी उत्पादन 41 लाख गांठ से सुधरकर 44 लाख गांठ पर पहुंचने की संभावना व्यक्त की गई है। आंध्र प्रदेश में क्षेत्रफल 25 प्रतिशत बढ़ा है।
दक्षिण भारत में रूई का कुल उत्पादन बढ़कर 1 करोड़ गांठ के आसपास पहुंचने के आसार हैं। तमिलनाडु एवं उड़ीसा में भी बेहतर उत्पादन की उम्मीद है।
