उड़द बाजार परिदृश्य: भारी आयात से दाम टूटे, खरीफ बुवाई पर असर संभव
11-Jun-2025 12:42 PM
उड़द बाजार परिदृश्य: भारी आयात से दाम टूटे, खरीफ बुवाई पर असर संभव
उत्पादन
★ 2024-25 के सीजन में भारत में उड़द का उत्पादन अनुमानित 20.2 लाख टन तक पहुंचा है। इसके अलावा म्यांमार में 9.25 लाख टन और ब्राज़ील में 1.3 लाख टन उत्पादन हुआ है। तीनों प्रमुख स्रोतों से भरपूर आवक के कारण घरेलू बाजार में उड़द की उपलब्धता काफी बेहतर।
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आयात/ निर्यात
★ भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक 8.2 लाख टन उड़द का आयात किया है, जो पिछले साल के 6.24 लाख टन के मुकाबले 31% ज्यादा है। इनमें म्यांमार से 7.15 लाख टन और ब्राज़ील से 0.84 लाख टन आयात शामिल हैं।
★ म्यांमार ने जनवरी से मार्च 2025 के बीच 3.91 लाख टन उड़द का निर्यात किया, जो पिछले साल इसी अवधि के 4.09 लाख टन के मुकाबले थोड़ा कम है। इसके बावजूद कुल वैश्विक आपूर्ति में लगातार वृद्धि हो रही है।
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कीमतों पर भारी दबाव:
म्यांमार में डॉलर में कीमतें (FOB दरें):
FAQ: 2 नवंबर 2023 को 1150$/MT, अब घटकर 775$/MT, कुल गिरावट- $375
SQ: 2 नवंबर 2023 को 1260$/MT, अब 850$/MT, कुल गिरावट- $ 410
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भारत में मंडी भाव (रुपये/क्विंटल):
मुंबई FAQ:
11 जून 2025: रुपए 6,750
11 जून 2024: रुपए 9,250
साल दर गिरावट: रुपए 2,498
चेन्नई FAQ:
11 जून 2025: रुपए 6,650
11 जून 2024: रुपए 9,100
साल दर गिरावट: रुपए 2,450
चेन्नई SQ:
11 जून 2025: रुपए 7,400
11 जून 2024: रुपए 10,000
साल दर गिरावट: रुपए 2,600
★ इस तेज गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक और घरेलू दोनों स्तर पर उड़द की भारी उपलब्धता है।
★ सरकार के पास भी बहुत कम।
★ अगर यही स्थिति बनी रही, तो कम कीमतों के कारण किसान खरीफ सीजन में उड़द की बुवाई से पीछे हट सकते हैं और अन्य लाभकारी फसलों की ओर रुख कर सकते हैं। म्यांमार और ब्राज़ील जैसे देशों में हर साल उड़द का उत्पादन बढ़ रहा है, जिससे यह भी तय माना जा रहा है कि भारत को नियमित रूप से आयात पर निर्भर रहना पड़ेगा।
★ जुलाई के मध्य या अगस्त से दालों की मांग निकलती है, जिससे कीमतों को थोड़ा बहुत समर्थन मिल सकता है।
★ मानसून और बिजाई पर रखें नज़र।
