वर्ष 2024-25 के दौरान सौंफ का रिकॉर्ड निर्यात
12-Jun-2025 06:51 PM
वर्तमान भावों में मंदे की संभावना नहीं
नई दिल्ली। विगत कुछ समय से निर्यातकों की सीमित खरीद बनी रहने के कारण सौंफ के भाव मंदे के साथ बोले जा रहे हैं। लेकिन वर्तमान में भाव न्यूनतम स्तर पर आ जाने के कारण अब मंदे की संभावना नहीं है।
उल्लेखनीय है कि चालू सीजन के दौरान हालांकि सौंफ उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। लेकिन गत वर्ष के हुए रिकॉर्ड उत्पादन के कारण बकाया स्टॉक संतोषजनक रहा। जिस कारण से कीमतों में तेजी नहीं बन पाई। सौंफ का मुख्यतः उत्पादन गुजरात एवं राजस्थान में होता है।
उत्पादन
गत वर्ष किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य न मिलने के कारण सौंफ के बिजाई क्षेत्रफल में गिरावट दर्ज की गई थी इसके अलावा फसल कटाई के समय तापमान में वृद्धि होने के कारण प्रति हेक्टेयर उत्पादकता भी प्रभावित रही। जिस कारण से इस चालू सीजन के दौरान देश में सौंफ की पैदावार 18/20 लाख बोरी होने के अनुमान लगाए गए है। जबकि गत वर्ष उत्पादन 38/40 लाख बोरी (प्रत्येक बोरी 55 किलो) का माना गया था। वर्ष 2023 में उत्पादन 20/22 लाख बोरी का रहा था।
आवक घटी
कुल उत्पादन का लगभग 60/70 प्रतिशत माल मंडियों में आ जाने के कारण दैनिक आवक घटने लगी है। वर्तमान में गुजरात की प्रमुख मंडी ऊंझा में आवक घटकर 4/5 हजार बोरी की रह गई है जबकि अप्रैल माह के दौरान आवक 25/30 हजार बोरी की हो रही थी। राजस्थान की नागौर एवं मेडता मंडी में भी आवक घटकर 1500/2000 बोरी की रह गई है।
भाव
वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर एवरेज क्वालिटी सौंफ का भाव 75/110 रुपए बोला जा रहा है जबकि हल्के मालों के भाव 65/90 रुपए बोले जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि विगत कुछ समय से निर्यात मांग कम चल रही है। लेकिन अब हालात धीरे-धीरे सुधरने लगे है जिस कारण से आगामी दिनों में निर्यात मांग में वृद्धि होने की संभावना है जिसका असर कीमतों पर तेजी का रहेगा।
निर्यात भाव
जानकारों का कहना है कि पहलगाव हमले के पश्चात सीमाओं पर बढ़ते तनाव के कारण सौंफ का निर्यात व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके अलावा लोकल व्यापार भी घटा है। निर्यातकों की सीमित लिवाली के चलते वर्तमान में सौंफ का निर्यात भाव घटकर 80/81 रुपए प्रति किलो का रह गया है जोकि अप्रैल माह के दौरान भाव 113/114 रुपए प्रति किलो चल रहा था।
निर्यात
गत सीजन में सौंफ के भाव मंदे रहने के कारण वर्ष 2024-25 के दौरान सौंफ के निर्यात में शानदार 94 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जबकि निर्यात भाव कम मिलने के कारण आय में केवल 14 प्रतिशत का इजाफा हुआ। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) के दौरान सौंफ का निर्यात 76586 टन का हुआ और निर्यात से प्राप्त आय 76544 लाख रुपए की रही। जबकि वर्ष 2023-24 (अप्रैल-मार्च) के दौरान 39564 टन का निर्यात हुआ और निर्यात से प्राप्त आय 66960 लाख रुपए की रही थी। वर्ष 2024-25 के दौरान सौंफ का रिकॉर्ड निर्यात हुआ। इसके पूर्व वर्ष 2020-21 में 40139 टन का रिकॉर्ड निर्यात किया गया था।
