वर्ष 2024 में दलहनों का कुल आयात बढ़कर 66.33 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान

28-Jan-2025 08:05 PM

नई दिल्ली । दाल-दलहनों के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में सरकार द्वारा किए जा रहे गंभीर प्रयासों पर विदेशों से होने वाला विशाल आयात गहरा आघात लगा रहा है।

वर्ष 2024 की सम्पूर्ण अवधि (जनवरी-दिसम्बर) के दौरान पीली मटर की अगुवाई में दलहनों का कुल आयात तेजी के उछलकर 66.33 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान है।

घरेलू बाजार में आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने तथा कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सरकार स्वयं विदेशों से दलहनों के आयात को प्रतोसहित कर रही है।

वर्तमान समय में देश के अंदर देसी चना, उड़द, मसूर, तुवर एवं पीली मटर जैसे दलहनों का शुल्क मुक्त आयात हो रहा है। 

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जनवरी से नवम्बर 2024 के दौरान देश में लगभग 2.32 लाख टन देसी चना, 6.95 लाख टन उड़द, 9.19 लाख टन मसूर, 11.43 लाख टन अरहर (तुवर) तथा 27.33 लाख टन पीली मटर का आयात हुआ।

दिसम्बर 2024 में 3.42 लाख टन देसी चना, 70 हजार टन उड़द, 1.74 लाख टन मसूर, 90 हजार टन, तुवर तथा 2.35 लाख टन पीली मटर का आयात होने का अनुमान है। इस तरह जनवरी-दिसम्बर 2024 में देसी चना का कुल आयात 3.74 लाख टन, उड़द का 7.65 लाख टन, मसूर का 10.93 लाख टन, अरहर (तुवर) का 12.33 लाख टन तथा पीली मटर का कुल आयात 29.68 लाख टन पर पहुंच जाने की संभावना है।

एक दशक से भी पहले देश में 60-65 लाख टन दलहनों का वार्षिक आयात हो रहा था जिसमें मटर की भागीदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा रहती थी।

अब दलहनों का आयात पीली मटर तथा तुवर के कारण पुनः तेजी से बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। केन्द्र सरकार ने वर्ष 2027 के अंत तक देश को दलहन उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने तथा वर्ष 2028 में इसका आयात पूर्ण रूप से बंद करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है लेकिन उत्पादन में स्थिरता तथा आयात में जोरदार वृद्धि को देखते हुए इस लक्ष्य को प्राप्त करण निहायत कठिन प्रतीत होता है।

तुवर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा एक साल के लिए बढ़ाकर 31 मार्च 2026 नियत की गई है जबकि अन्य दलहनों के शुल्क मुक्त आयात की अवधि भी बढ़ाए जाने की संभावना है।