वर्ष 2027 तक दलहनों का आयात बंद करवाना कृषि मंत्री के लिए प्रमुख चुनौती
03-Jul-2024 07:27 PM
नई दिल्ली । केन्द्रीय कृषि मंत्री को एक भारी-भरकम लक्ष्य दिया गया है कि वर्ष 2027 तक दलहनों के आयात पर निर्भरता का समाप्त करते हुए स्वदेशी उत्पादन से इसकी घरेलू मांग, खपत एवं जरूरत को पूरा किया जाए।
दलहनों का उत्पादन पिछले एक दशक के दौरान काफी बढ़ा है मगर साथ ही साथ इसकी मांग एवं खपत में भी जबरदस्त बढ़ोत्तरी हुई है जिससे विदेशों से इसके आयात पर निर्भरता घटने के बजाए और भी बढ़ गई है। 2023-24 के सीजन में अल नीनो मौसम चक्र के प्रकोप एवं प्रभाव से दलहन फसलों के घरेलू उत्पादन में भारी गिरावट आ गई जिससे आयात बढ़कर 40 लाख टन से ऊपर पहुंच गया।
स्मरणीय है कि 4 जनवरी 2024 को तत्कालीन और मौजूदा सहकारिता मंत्री ने घोषणा की थी कि वर्ष 2027 तक भारत में विदेशों से दाल-दलहन का आयात बिल्कुल बंद हो जाएगा और स्वदेशी उत्पादन से घरेलू जरूरतों को पूरा किया जाएगा।
भारत जैसे देश के लिए यह अत्यन्त महत्वाकांक्षी लक्ष्य माना गया। सहकारिता मंत्री ने कहा था कि दिसम्बर 2027 तक भारत दलहनों के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगा और जनवरी 2028 से बाहर से एक किलो भी दलहन नहीं मंगाया जाएगा।
भारत दुनिया में दाल-दलहनों का सबसे बड़ा उत्पादक, खपतकर्ता एवं आयातक देश बना हुआ है। महज तीन वर्षों के अंदर अगर दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य हासिल हो गया तो यह निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
वर्ष 2015-16 से अब तक दलहनों के उत्पादन में 37 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोत्तरी हुई मगर फिर भी विशाल आयात का सिलसिला खत्म नहीं हुआ।
बीच-बीच में सरकार ने देसी चना एवं पीली मटर के आयात को रोकने का प्रयास किया और मूंग एक आयात पर प्रतिबंध भी लगा दिया जबकि तुवर-उड़द के लिए वार्षिक आयात कोटा का प्रचलन शुरू किया।
लेकिन अब इन सभी नियंत्रणों को समाप्त कर दिया गया है। नए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अच्छे रणनीतिकार हैं और उनसे यह उम्मीद की जाती है कि वे देश को अगले चार साल में दाल-दलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अग्रसर करने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखेंगे।
