वर्षा पर आश्रित क्षेत्रों में रबी फसलों के लिए बढ़ रहा है खतरा
07-Dec-2024 10:57 AM
नई दिल्ली । देश के अधिकांश इलाकों में मानसून सीजन के बाद वर्षा का अभाव देखा जा रहा है जबकि तापमान सामान्य स्तर से ऊंचा चल रहा है। इससे न केवल रबी फसलों की बिजाई करने में किसानों को परेशानी हो रही है बल्कि कुछ इलाकों में बीज में अंकुरण भी कमजोर है।
वर्षा पर आश्रित क्षेत्रों में खेतों की मिटटी से नमी तेजी से गायब होती जा रही है जिससे समस्या आगे और भी गंभीर होने की आशंका है। किसान जोखिम उठाकर फसलों की बिजाई कर रहे हैं।
पिछले सप्ताह तक गेहूं, धान, दलहन एवं मोटे अनाजों का बिजाई क्षेत्र गत से आगे चल रहा था जबकि तिलहन फसलों का रकबा पीछे था। बिजाई की रफ्तार अनेक इलाकों में धीमी पड़ने लगी है।
हालांकि गेहूं सहित अधिकांश कृषि जिंसों का बाजार भाव अभी आकर्षक स्तर पर चल रहा है और सरकार ने रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अच्छी बढ़ोत्तरी भी कर दी है जिससे किसान क्षेत्रफल बढ़ाने के प्रति उत्साहित है मगर उन्हें मौसम का भरपूर सहारा नहीं मिल रहा है।
यदि तापमान ऊंचे स्तर पर बरकरार रहा तो रबी फसलों की औसत उपज दर प्रभावित हो सकती है। दिसम्बर से फरवरी तक का मौसम रबी फसलों के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।
ऐसा प्रतीत होता है कि कुल उत्पादन क्षेत्र तो पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल के करीब पहुंच जाएगा मगर उपज दर में कुछ गिरावट आ सकती है।
यदि इस बीच एक-दो बारिश हो जाए तथा तपमान में गिरावट आ जाए तो बेहतर उत्पादन की उम्मीद बढ़ सकती है। खरीफ फसलों की कटाई में देर होने से इस बार रबी फसलों की बिजाई भी विलम्ब से शुरू हुई।
