विशाल मात्रा में चावल का शिपमेंट होने से पश्चिम अफ्रीका के लिए कंटेनर किराए में वृद्धि
05-Dec-2024 01:47 PM
हैदराबाद । पश्चिमी अफ्रीका के देशों में भारत से विशाल मात्रा में चावल का आयात किया जा रहा है जिससे अन्य जिंसों के शिपमेंट के लिए कंटेनरों की कमी पड़ रही है। इसके फलस्वरूप भारतीय उप महाद्वीप से पश्चिम अफ्रीका के लिए कंटेनरों का किराया बढ़ गया है।
मध्य नवम्बर से ही इस मार्ग पर किराए में वृद्धि हो रही है और जनवरी 2025 तक इसका सिलसिला जारी रहने की संभावना है। कंटेनरों के बढ़ते किराए को देखते हुए आयातक बल्क रूप में चावल के आयात को प्राथमिकता दे सकते हैं।
जानकार सूत्रों के अनुसार भारत के पूर्वी तट के बंदरगाहों से पश्चिम अफ्रीका के कोटोनोऊ जैसे देशों तक जाने के लिए कंटेनरों का किराया भाड़ा अक्टूबर की तुलना में नवम्बर के दौरान करीब 22 प्रतिशत ऊंचा हो गया।
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्नम (विजाग) बंदरगाह से पश्चिम अफ्रीका के देशों तक कंटेनरों का किराया भाड़ा अक्टूबर में 1900 डॉलर प्रति टीईयू था जो नवम्बर में बढ़कर 2400 डॉलर प्रति टीईयू पर पहुंच गया। दिसम्बर शिपमेंट के लिए कोटोनोऊ तथा लोम बंदरगाह तक के लिए यह किराया मान्य है।
हालांकि अवकाश वाले सीजन के दौरान अन्य व्यापारिक मार्गों पर कंटेनरों के किराए में गिरावट आ रही है लेकिन भारतीय उप महाद्वीप से पश्चिम अफ्रीका के लिए स्पॉट शिपमेंट के तहत भाड़ा बढ़ता जा रहा है क्योंकि यह चावल शिपमेंट के लिए पीक सीजन माना जाता है।
भारत से चावल भेजने के लिए जहाजों पर जगह की कमी पड़ने लगी है। पश्चिम अफ्रीका के देश जल्दी-जल्दी भारतीय चावल का आयात कर रहे हैं।
बंदरगाहों पर चावल निर्यात शिपमेंट के संचालन की प्रक्रिया एवं मशीनरी पर दबाव काफी बढ़ गया है। हालत यह हो गई है कि अब भारत-अफ्रीका समुद्री मार्ग पर छोटे-छोटे जहाजों पर परिचालन बढ़ाया जा रहा है जिससे जगह की संकीर्णता बढ़ गई है।
भारत में चावल के नए माल की आवक बढ़ने लगी है और इसका निर्यात मूल्य भी आकर्षक स्तर पर चल रहा है जिससे अफ्रीका में इसकी जोरदार मांग बनी हुई है।
