विशाल स्टॉक एवं सीमित मांग से लालमिर्च की कीमतों में गिरावट

05-Aug-2025 03:32 PM

गुंटूर। वर्ष 2023 में लालमिर्च का घरेलू बाजार भाव उछलकर ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था जिससे उत्साहित होकर किसानों ने वर्ष 2024 में इस महत्वपूर्ण मसाला फसल के बिजाई क्षेत्र में भारी बढ़ोत्तरी कर दी।

मालूम हो कि वर्ष 2023-24 के दौरान एक समय ब्यादगी लालमिर्च का मूल्य उछलकर 450 रुपए प्रति किलो एवं तेजा तथा एस 4 वैरायटी का दाम 270 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया था। 

2024-25 के सीजन में बिजाई क्षेत्र बढ़ने तथा मौसम की हालत अनुकूल रहने से लालमिर्च के उत्पादन में जोरदार इजाफा हुआ और जब इसके नए माल की जोरदार आपूर्ति शुरू हुई तब थोक मंडी भाव तेजी से नीचे लुढ़कने लगा।

घटती कीमतों को देखते हुए उत्पादकों ने कोल्ड स्टोरेज में अपनी लालमिर्च के स्टॉक का भंडारण कर दिया ताकि आगामी महीनों में भाव ऊंचा होने पर उसकी बिक्री करके अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सके।

2024-25 सीजन के दौरान लालमिर्च का निर्यात प्रदर्शन उत्साहवर्धक नहीं रहा। माल में कीटनाशी रसायनों के ज्यादा अवशेष की स्थिति के कारण कुछ निर्यात खेपों को रिजेक्ट कर दिया गया।

दरअसल उत्पादकों का ध्यान लालमिर्च की उपज दर एवं पैदावार बढ़ाने पर केन्द्रित रहा और इसलिए उसने क्वालिटी सुधरने पर ज्यादा जोर नहीं दिया। घरेलू एवं निर्यात मांग कमजोर होने तथा कोल्ड स्टोरेज में विशाल स्टॉक मौजूद रहने से लालमिर्च की कीमतों पर दबाव काफी बढ़ गया। 

प्रमुख उत्पादक राज्यों- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक एवं मध्य प्रदेश के विशाल घटते बाजार भाव से काफी हतोत्साहित हैं और लालमिर्च की खेती में उसका विश्वास डगमगाने लगा है।

इसके फलस्वरूप चालू वर्ष (2025) के दौरान इन राज्यों में तथा राष्ट्रीय स्तर पर लालमिर्च के बिजाई क्षेत्र में भारी गिरावट आने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

उद्योग-व्यापार क्षेत्र के अनुसार इस महत्वपूर्ण मसाला फसल के बिजाई क्षेत्र में पिछले साल के मुकाबले चालू वर्ष के दौरान कर्नाटक में 45 प्रतिशत, तेलंगाना एवं मध्य प्रदेश में 40-40 प्रतिशत तथा आंध्र प्रदेश में 35 प्रतिशत की जोरदार गिरावट आने की आशंका है।

वर्तमान समय में देश के अंदर करीब 2.20 करोड़ बोरी लालमिर्च का विशाल स्टॉक मौजूद है जो गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में 67 प्रतिशत ज्यादा है। इसके फलस्वरूप अगले मार्केटिंग सीजन के दौरान जब नई फसल की आवक शुरू होगी तब कीमतों पर दबाव बरकरार रह सकता है।