वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत से कुल निर्यात नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद
09-Jul-2025 01:19 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा है कि वैश्विक बाजार की तमाम चुनौतियों एवं बाधाओं के बावजूद भारत से वाणिज्यिक उत्पादों का निर्यात इस बार रिकॉर्ड तोड़ स्तर की और बढ़ रहा है और आगामी महीनों में भी इसका सिलसिला बरकरार रहने की उम्मीद है।
वाणिज्य मंत्री के मुताबिक 2024-25 के वित्त वर्ष में भारतीय उत्पादों का निर्यात बढ़कर 825 अरब डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था जबकि 2025-26 के वित्त वर्ष में यह और भी बढ़कर 870 अरब डॉलर की सीमा पार करते हुए सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच जाने के आसार हैं। भारत का ध्यान मूल्य संवर्धित उत्पादों तथा श्रमिकों की बहुलता वाली वस्तुओं एवं सेवाओं के निर्यात संवर्धन पर केन्द्रित है।
वाणिज्य मंत्री के अनुसार चालू वर्ष के दौरान देश से वस्तुओं / उत्पादों के निर्यात में 5-6 प्रतिशत एवं सेवाओं के निर्यात में 9-10 प्रतिशत का इजाफा होने की उम्मीद है।
कृषि एवं खाद्य उत्पादों का सामान्य शिपमेंट जारी रहेगा लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग एवं फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धी लगातार बढ़ती जा रही है।
मंत्री महोदय के मुताबिक हाल के वर्षों में कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) किया गया है जिससे वैश्विक व्यापार में भारत को अपनी पोजीशन मजबूत करने में सहायता मिली है।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया तथा इंग्लैंड के साथ एफटीए पहले ही हो चुका और वहां भारत से निर्यात में अच्छी वृद्धि हो रही है। अमरीका के साथ व्यापारिक करार पाइप लेने में हैं। यूरोपीय संघ से भी इसका प्रयास किया जा रहा है।
जहां तक संयुक्त अरब अमीरात की बात है तो वहां पिछले चार-पांच वर्षों के अंदर सेवाओं (सर्विसेज) का निर्यात लगभग दोगुना बढ़ गया है जबकि ऑस्ट्रेलिया में इसमें करीब तिगुनी वृद्धि हो गई है।
ऑस्ट्रेलिया में पहले करीब 3 अरब डॉलर का निर्यात हो रहा था जो अब 8 अरब डॉलर को पार कर गया है। लेकिन जापान में इसकी गति धीमी देखी जा रही है।
सरकार आसियान देशों जापान तथा दक्षिण कोरिया के साथ एफटीए करना चाहती थी लेकिन जापान इसके लिए तैयार नहीं हुआ और दक्षिण कोरिया इस पर विचार कर रहा है।
चीन के साथ व्यापार में सावधानी बरती जा रही है। भारत, सरकार सभी क्षेत्रों से निर्यात को बढावा दे रही है और विदेश व्यापार घाटा को न्यूनतम स्तर पर करने का प्रयास जारी है।
