वैश्विक चावल बाजार पर दबाव

10-Jan-2026 11:02 AM

वर्ष 2025 की भांति 2026 में भी चावल के वैश्विक बाजार मूल्य पर दबाव काफी हद तक बरकरार रहने की संभावना है क्योंकि प्रमुख निर्यातक देशों में बेहतर उत्पादन होने से इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी रहेगी।

चूंकि सभी आयातक देश भी इस वास्तविकता से अवगत हैं इसलिए वे चावल की खरीद में ज्यादा जल्दबाजी नहीं दिखाएंगे और केवल तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने लायक मात्रा में ही इसका आयात कर सकते हैं।

इंडोनेशिया पहले चावल का एक अग्रणी खरीदार देश था लेकिन चालू वर्ष के दौरान वहां इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का आयात नहीं या नगण्य होने की संभावना है क्योंकि वह इसके उत्पादन में लगभग आत्मनिर्भर हो गया है।

इधर भारत, थाईलैंड एवं वियतनाम जैसे शीर्ष निर्यातक देशों में चावल का बड़ा अधिशेष स्टॉक रहने का अनुमान है जिसकी बिक्री के लिए उसमें प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

पाकिस्तान, अमरीका और म्यांमार जैसे देश भी चावल का निर्यात बढ़ाने का हर संभव प्रयास कर सकते हैं। भारतीय बासमती चावल के निर्यात के लिए ईरान और अमरीका का बाजार बंद होने की आशंका है लेकिन अफ्रीकी एवं एशियाई देशों में गैर बासमती चावल का बेहतर शिपमेंट हो सकता है क्योंकि इसका ऑफर मूल्य विदेशी खरीदारों के लिए आकर्षक स्तर पर रहने की उम्मीद है।

पिछले साल भारत से कुल 201 लाख टन चावल का शानदार निर्यात हुआ था और चालू वर्ष का निर्यात उसके आसपास ही रहने की संभावना है। इस स्थिति को भी संतोषजनक माना  जा सकता है। 

दुनिया में लगभग 90 प्रतिशत चावल का उत्पादन एशिया महाद्वीप में होता है और यहां भारत चीन, इंडोनेशिया, बांग्ला देश, थाईलैंड, वियतनाम, फिलीपींस, म्यांमार एवं पाकिस्तान इसके प्रमुख उत्पादक देश है।

भारत पिछले अनेक वर्षों से चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश बना हुआ है और तमाम चुनौतियों एवं बाधाओं के बावजूद अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजार में इसकी बादशाहत कायम है। चालू वर्ष के दौरान चावल का वैश्विक बाजार भाव नरम रहने से आयातक देशों को राहत मिलने की उम्मीद है।