वियतनाम के चावल निर्यातकों के लिए आगामी महीने रहेंगे चुनौतीपूर्ण

24-Jan-2025 06:42 PM

हनोई । दक्षिण-पूर्व एशिया में अवस्थित देश- वियतनाम के चावल निर्यातकों के लिए 2024 का वर्ष काफी हद तक शानदार और सफल रहा लेकिन वर्ष 2025 के दौरान उसे अनेक चुनौतियों का सामान करना पड़ सकता है।

उद्योग-व्यापार क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान वियतनाम से चावल के निर्यात में मात्रा एवं आमदनी दोनों दृष्टिकोण से गिरावट आ सकती है

क्योंकि एक तो चावल की निर्यात मांग अपेक्षाकृत कमजोर रहेगी तथा दूसरे, अन्य निर्यातक देशों से प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ जाएगी। दरअसल भारत की मजबूत चुनौती से वियतनाम की कठिनाई बढ़ेगी। 

भारत और थाईलैंड के बाद वियतनाम दुनिया में चावल का तीसरा सबसे प्रमुख चावल निर्यातक देश है। पिछले साल की शानदार सफलता को देखते हुए वहां वर्ष 2025 के लिए चावल के निर्यात का लक्ष्य ऊंचा रखा गया है।

लेकिन इस वर्ष उसके निर्यातकों को गैर परम्परागत बाजारों में भारत की कठिन प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा जो आसान नहीं है।

भारत के जिन परम्परागत बाजारों पर पिछले साल थाईलैंड और वियतनाम ने कब्जा कर लिया था वह बाजार इस बार इसके हाथ से फिसल सकता है क्योंकि भारतीय चावल के निर्यात शिपमेंट की प्रक्रिया स्वतंत्र हो चुकी है। 

भारत में चावल का विशाल अधिशेष स्टॉक उपलब्ध है और निर्यात ऑफर मूल्य भी आकर्षक स्तर पर बरकरार है। इसके फलस्वरूप एशिया तथा अफ्रीका के आयातक भारतीय चावल की खरीद में जबरदस्त दिलचस्पी दिखाने लगे हैं।

इसका सिलसिला आगे भी बरकरार रहेगा। वियतनाम में वर्ष 2023 एवं 2024 के मुकाबले 2025 में चावल का निर्यात ऑफर काफी नीचे रहने की संभावना है जिससे निर्यात आय में भारी गिरावट आ सकती है। यदि यह ऑफर मूल्य घटकर वर्ष 2022 के स्तर से भी नीचे आ जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी। 

उद्योग-व्यापार मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार भारत से चावल का निर्यात पूरी तरह बंधन मुक्त हो जाने के कारण वैश्विक बाजार भाव पर दबाव काफी बढ़ गया है

लेकिन वियतनाम अब अच्छी क्वालिटी वाले चावल के निर्यात पर विशेष जोर दे रहा है जिससे इंडोनेशिया एवं फिलीपींस जैसे देशों में इसकी गहरी पहुंच सुनिश्चित हो रही है।