वियतनाम की गंभीर चुनौती से काजू उद्योग का संकट बढ़ा

11-Nov-2025 03:26 PM

मंगलोर। भारतीय काजू प्रसंस्करण उद्योग को अनेक चुनौतियों एवं समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है जिसमें वियतनाम से बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी शामिल है। वियतनाम संसार में प्रसंस्कृत काजू का सबसे प्रमुख निर्यातक देश है।

वैसे वर्तमान समय में वियतनामी काजू प्रोसेसर्स को भी गंभीर वित्तीय कठिनाइयों के दौर से गुजरना पड़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काजू फली (आरसीेएन) का दाम तेजी से बढ़ता जा रहा है जबकि प्रसंस्कृत काजू कर्नेल के निर्यात मूल्य में इसके अनुरूप बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है।

इसके फलस्वरूप प्रोसेसर्स का मार्जिन काफी घट गया है और वियतनाम की अनेक प्रोसेसिंग कंपनियां ऋणात्मक होने से उसे भारी आर्थिक घाटा होने लगा है। कुछ कंपनियां तो दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गई है और उसके बंद होने का खतरा बढ़ गया है। 

हालांकि प्रसंस्कृत काजू के सम्पूर्ण वैश्विक निर्यात बाजार में वियतनाम की भागीदारी अब भी 80 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है लेकिन उसका अपना उत्पादन बहुत कम यानी केवल लगभग 3 लाख टन ही है उसे विदेशों से प्रति वर्ष अत्यन्त विशाल मात्रा में कच्चे काजू का आयात करना पड़ता है क्योंकि वहां इसकी कुल संचित वार्षिक प्रोसेसिंग क्षमता उछलकर 35 लाख टन पर पहुंच गई है।

कच्चे काजू का आयात मुख्यत: अफ्रीकी देशों से किया जाता है लेकिन हाल के वर्षों में कई अफ्रीकी देशों ने इसके निर्यात पर मात्रात्मक नियंत्रण या प्रतिबंध लगा दिया है क्योंकि वहां काजू प्रोसेसिंग की नई-नई इकाइयां स्थापित हो रही है जिसकी मांग एवं जरूरत को पूरा करने को प्राथमिकता दी जा रही है।

ये देश अब कच्चे काजू के बजाए प्रसंस्कृत काजू का निर्यात बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। इसके फलस्वरूप वियतनाम की प्रोसेसिंग इकाइयों को पर्याप्त मात्रा में कच्चे काजू की आपूर्ति नहीं हो रही है और न ही उसकी प्रोसेसिंग क्षमता का पूरा उपयोग हो रहा है।

भारतीय काजू उद्योग को भी विभिन्न समस्याओंं से जूझना पड़ रहा है। जनवरी से अक्टूबर 2025 के दस महीनों में भारत से यूरोपीय संघ को प्रसंस्कृत काजू का निर्यात घटकर 6898 टन पर अटक गया जो गत वर्ष की समान अवधि के शिपमेंट 8050 टन से 14.3 प्रतिशत कम रहा दूसरी ओर वहां कोट डी आइवरी देश से प्रसंस्कृत काजू का निर्यात 32 प्रतिशत बढ़ गया। अमरीका में भी भारतीय काजू के निर्यात की भागीदारी तेजी से घट रही है।