यूरोपीय संघ में गेहूं, दलहन एवं रेपसीड का आयात क्रमिक रूप से घटने की संभावना
10-Jan-2026 01:09 PM
ब्रुसेल्स। यूरोपीय आयोग द्वारा वर्ष 2025 से 2035 के बीच कृषि क्षेत्र के परिदृश्य के लिए जो रिपोर्ट तैयार की गई है उससे पता चलता है कि अगले 10 वर्षों के दौरान यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में गेहूं, दलहन एवं रेपसीड आदि के आयात में क्रमिक रूप से गिरावट आएगी क्योंकि इसके उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी हो सकती है।
गेहूं की औसत उपज दर में अच्छी बढ़ोत्तरी हो सकती है जबकि मक्का एवं जौ की उत्पादकता काफी हद तक स्थिर रहने की संभावना है। दूसरी ओर इसकी मांग एवं खपत में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के मुताबिक इन 10 वर्षों की अवधि के दौरान यूरोपीय संघ में सॉफ्ट गेहूं के आयात में सालाना औसतन 3.3 प्रतिशत की कमी आने की संभावना है जबकि मक्का का आयात भी कुछ घट सकता है।
लेकिन जई इसका अपवाद रहेगा और इसके आयात में नियमित रूप से इजाफा होने का अनुमान है। जहां तक दलहन एवं तिलहन का सवाल है तो इसके उत्पादन एवं आयात के समीकरण में भारी बदलाव होने की संभावना व्यक्त की गई है।
वर्ष 2035 तक यूरोपीय संघ को दलहनों के आयात में औसतन 2.1 प्रतिशत की कटौती करने में सहायता मिल सकती है जहां तक रेपसीड (सरसों) की बात है तो इसका उत्पादन 184 लाख टन के आसपास स्थिर रह सकता है लेकिन जैव ईंधन निर्यात में मांग करीब 4.5 प्रतिशत घटने की संभावना है।
इसके फलस्वरूप क्रूड आयात में कमी आ सकती है। यूरोपीय संघ में पशु आहार की खपत भी घटने की संभावना है इसलिए इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली जिंसों के आयात में गिरावट आ सकती है।
