यूरोपीय संघ में काजू के आयात में जोरदार बढ़ोत्तरी
16-Jun-2025 03:06 PM
मंगलोर। यूरोपीय संघ में काजू के आयात में लगातार जबरदस्त बढ़ोत्तरी हो रही है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले चालू वर्ष की पहली तिमाही यानी जनवरी-मार्च 2025 के दौरान यूरोपीय संघ में काजू के आयात की मात्रा 16 प्रतिशत बढ़कर 42,850 टन तथा इस पर खर्च होने वाली राशि 42 प्रतिशत उछलकर 27.30 करोड़ यूरो (30 करोड़ डॉलर) पर पहुंच गई।
काजू भाव अपेक्षाकृत ऊंचा रहा। यूरोपीय संघ में पहली तिमाही के दौरान काजू के हुए कुल आयात में वियतनामी माल की भागीदारी 72 प्रतिशत रही।
चूंकि अमरीका ने वियतनामी उत्पादों के आयात पर 46 प्रतिशत का भारी-भरकम सीमा शुल्क लगाने की घोषणा की है इसलिए वियतनाम के अधिकांश काजू निर्यातक अब यूरोपीय संघ, जापान, चीन तथा मध्य पूर्व एशिया के बाजारों पर अपना ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं।
ध्यान देने की बात है कि वर्तमान समय में वियतनाम से लगभग 30 प्रतिशत काजू का निर्यात अकेले अमरीका को किया जाता है लेकिन कीमतों में हो रही बढ़ोत्तरी से मामला बिगड़ सकता है।
अफ्रीका में अवस्थित आइवरी कोस्ट दुनिया में कच्चे काजू के सबसे अग्रणी उत्पादक देशों में शामिल है और वह अमरीका में प्रसंस्कृत काजू का निर्यात बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
वहां कच्चा काजू की प्रोसेसिंग के लिए नई-नई इकाइयां स्थापित हो रही है और कच्चे काजू की क्वालिटी में भी काफी सुधार आ गया है। इसके फलस्वरूप वहां से यूरोपीय संघ को प्रसंस्कृत काजू के निर्यात में 43 प्रतिशत की भारी बढ़ोत्तरी हो गई।
पश्चिम-अफ्रीकी देश- आइवरी कोस्ट अब प्रोसेस्ड काजू के वैश्विक निर्यात बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है जबकि पहले वह कच्चे काजू का सर्वाधिक निर्यात कर रहा था।
भारत यूरोपीय संघ को काजू का तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश बना हुआ है। लेकिन समीक्षाधीन तिमाही के दौरान वहां इसके निर्यात में महज 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दरअसल भारत में काजू की घरेलू मांग एवं खपत तेजी से बढ़ती जा रही है और कीमतों में भी उतार-चढ़ाव बना रहता है।
हालांकि अमरीका के भारतीय काजू पर 21 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है लेकिन इसके प्रभाव का अभी तक कोई स्पष्ट संकेत सामने नहीं आया है।
