यूरिया का एफआरपी बढ़ाने का प्रस्ताव नामंजूर
08-Jan-2026 11:11 AM
नई दिल्ली। केन्द्रीय उर्वरक मंत्रालय ने यूरिया का उच्चतम खुदरा मूल्य (एफआरपी) बढ़ाने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। गत 3 जनवरी 2026 को आयोजित एक चिंतन शिविर में कुल 15 प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया।
समझा जाता है कि इस शिविर में सब्सिडी वाले उर्वरकों की सूची में कुछ अन्य उत्पादों को शामिल करने तथा निर्धारित बिक्री मूल्य से ऊंचे दाम पर इन उत्पादों को बेचने की स्वीकृति देने के मामले पर भी विस्तार से चर्चा की गई। फसलों के लिए इन पोषक तत्वों की कीमत बढ़ाने का मुद्दा उठाया गया मगर उसे स्वीकृति नहीं मिल सकी।
केन्द्रीय उर्वरक मंत्री ने इन दोनों प्रस्तावों को सही माना। उनका कहना था कि यूरिया सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला रासायनिक उर्वरक है जिसका इस्तेमाल छोटे एवं सीमांत किसान भी करते हैं।
यदि इसका दाम बढ़ाया गया तो उन किसानों की कठिनाई बढ़ जाएगी। उन्होंने उर्वरक मंत्रालय के अधिकारियों तथा उर्वरक उद्योग को एक साथ मिलकर इस दिशा में काम करने का सुझाव दिया।
इस एक दिवसीय चिंतन शिविर में जिन अन्य प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई उसमें परिवहन सब्सिडी नीति, मृदा स्वास्थ्य, वैकल्पिक उर्वरक (नैनो, नए जमाने का उर्वरक), उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना, अधिक से अधिक किसानों तक उर्वरकों की पहुंच सुनिश्चित करना तथा विभिन्न माध्यमों से किसानों को जागरूक बनाना जैसे विषय भी शामिल थे।
रबी फसलों की बिजाई लगभग समाप्त होने के बाद अब केन्द्र तथा राज्य सरकारों का ध्यान आगामी खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने पर केन्द्रित हो गया है। खरीफ फसलों की बिजाई जून से आरंभ होकर सितम्बर तक जारी रहती है। देश में भारी मात्रा में यूरिया का आयात हो रहा है।
