30 नवम्बर तक चीनी का उत्पादन 41.08 लाख टन पर पहुंचने का इस्मा का अनुमान

02-Dec-2025 04:07 PM

नई दिल्ली। प्राइवेट चीनी मिलों के शीर्ष संगठन- इंडियन शुगर एंड बायोएनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) की नवीनतम रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रियाशील इकाइयों की संख्या बढ़ने से अधिक मात्रा में गन्ना की क्रशिंग होने तथा गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर ऊंची रहने के कारण 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) को आरंभिक दो महीनों में यानी अक्टूबर-नवम्बर 2025 के दौरान चीनी का घरेलू उत्पादन बढ़कर 41.08 लाख टन पर पहुंच गया जो पिछले सीजन की समान अवधि के उत्पादन 28.76 लाख टन से काफी अधिक है। 

इस्मा के अनुसार पिछले साल 30 नवम्बर तक 376 चीनी मिलों में गन्ना की क्रशिंग आरंभ हुई थी जबकि चालू सीजन की इसी तिथि तक क्रियाशील चीनी मिलों की संख्या बढ़कर 428 पर पहुंच गई।

इस्मा के अनुसार इस बार गन्ना की औसत उपज दर तथा गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर में भी सुधार आने के संकेत मिल रहे हैं। समूचे देश में गन्ना की क्रशिंग धीरे-धीरे जोर पकड़ती जा रही है और चीनी मिलों को अच्छी मात्रा में गन्ना प्राप्त हो रहा है। 

एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल के मुकाबले चालू मार्केटिंग सीजन के शुरूआती दो महीनों के दौरान चीनी का उत्पादन उत्तर प्रदेश में 11.70 लाख टन से बढ़कर 13.97 लाख टन पर पहुंचा और महाराष्ट्र में यह उछलकर 16.95 लाख टन पर पहुंच गया जो गत वर्ष 4.60 लाख टन ही रहा था।

कर्नाटक तथा गुजरात में भी चीनी के बेहतर उत्पादन का आंकड़ा सामने आया है। चीनी के उपरोक्त उत्पादन आंकड़ों में एथनॉल निर्माण में इस्तेमाल होने वाली चीनी शामिल नहीं है। 

इस्मा ने एक बार फिर सरकार से चीनी के एक्स फैक्टरी न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोत्तरी करने का आग्रह किया है। पिछले छह वर्षों से इसमें  कोई बदलाव नहीं हुआ है जबकि गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में प्रत्येक साल इजाफा होता रहा।

इससे चीनी उत्पादन का लागत खर्च काफी ऊंचा हो गया है। उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा एवं उत्तराखंड में इस बार गन्ना के दाम में भारी बढ़ोत्तरी कर दी गई है जिससे अखिल भारतीय स्तर पर चीनी का औसत उत्पादन खर्च बढ़कर 4172 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। इससे मिलर्स को सही समय पर गन्ना किसानों को भुगतान करने में कठिनाई होगी।