आंध्र प्रदेश में धान में नमी के ऊंचे अंश से किसान चिंतित

10-Dec-2025 06:17 PM

विजयवाड़ा। दक्षिणी प्रान्त- आंध्र प्रदेश में हाल में आए भयंकर समुद्री चक्रवाती तूफानों से धान की फसल को कोई गंभीर नुकसान तो नहीं हुआ लेकिन दाने की क्वालिटी आंशिक रूप से प्रभावित हो गई क्योंकि बारिश के कारण उसमें नमी का अंश बढ़ गया।

नमी के ऊंचे स्तर के कारण किसानों को सरकारी क्रय केन्द्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपना धान बेचने में भारी कठिनाई हो रही है।

समुद्री तूफानों एवं उससे उत्पन्न वर्षा का ज्यादा प्रकोप तमिलनाडु पर देखा गया लेकिन वहां किसानों को कोई खास समस्या नहीं हुई क्योंकि इस सुदूर दक्षिणी राज्य में 1 सितम्बर से ही धान की सरकारी खरीद आरंभ हो गई थी। 

आंध्र प्रदेश में खरीफ कालीन धान की सरकारी खरीद की प्रक्रिया देर से आरंभ हुई और अभी भी जारी है। लेकिन कई क्षेत्रों में धान में नमी का अंश 20 से 26 प्रतिशत तक देखा जा रहा है जो 17  प्रतिशत के स्वीकृत या मान्य स्तर से बहुत ऊंचा है।

किसानों को आशंका है कि सरकारी क्रय केन्द्रों पर एजेंसियां पहले तो इस धान की खरीद से इंकार कर सकती हैं और यदि खरीद के लिए राजी भी हुई तो न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी कटौती कर देगी। इसका मतलब यह हुआ कि उस धान को काफी सस्ते दाम पर खरीदा जा सकता है। 

विजयवाड़ा एवं उसके आसपास के इलाकों में किसान पश्चिमी बाईपास, इनर रिंग रोड तथा निकटवर्ती गांवों में सड़कों पर अपने धान को सुखाने का प्रयास कर रहे हैं।

राज्य के कई अन्य भागों में भी यही स्थिति देखी जा रही है। चूंकि किसानों को अपने धान को सुखाने के लिए पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है इसलिए उसे जहां भी जगह मिलती है वहीं अपने स्टॉक को फैला रहे हैं।

तारपोलिन पर धान को फैलाने के बाद किसानों को रात-दिन उसकी रखवाली भी करनी पड़ती है उन्हें तगड़ी घूप का इंतजार रहता है। 

हालांकि आंध्र प्रदेश में इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान धान की अच्छी खेती हुई और इसकी पैदावार भी बेहतर होने के संकेत मिल रहे हैं लेकिन मौसम सम्बन्धी समस्याओं के कारण इसकी सरकारी खरीद की गति काफी धीमी देखी जा रही है।