आयात कुछ महंगा होने से खाद्य तेलों के दाम में थोड़ा सुधार
13-Feb-2025 05:08 PM
मुम्बई । निर्यातक देशों में ऑफर मूल्य मजबूत होने तथा डॉलर के मुकाबले रुपए की विनिमय दर में गिरावट आने के कारण विदेशों से खाद्य तेलों का आयात कुछ महंगा बैठने लगा है जिससे इसके घरेलू बाजार मूल्य में थोड़ा सुधार आ गया है।
यद्यपि भारत में मुख्यत: पाम तेल, सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल का ही आयत होता है लेकिन इन आयातित तेलों की कीमतों में होने वाली बढ़ोत्तरी का असर अन्य खाद्य तेलों पर भी देखा जा रहा है जिसमें सरसों तेल, मूंगफली तेल, कॉटन सीड (बिनौला सीड) तथा राइस ब्रान तेल आदि शामिल है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार पिछले दिनों खाद्य तेल के दाम में 5-6 रुपए प्रति किलो तक की वृद्धि हुई लेकिन यह स्थायी रहने में संदेह है।
वैसे जनवरी 2025 में खाद्य तेलों का आयात घट गया जिसका प्रमुख कारण पाम तेल के आयात में आई जबरदस्त गिरावट है लेकिन यदि रुपए की विनिमय दर में सुधार आया तो बाजार पर उसका प्रभाव पड़ेगा।
ज्ञात हो कि 1 डॉलर का मूल्य 8384 रुपए हो गया था जिससे खाद्य तेलों का आयात खर्च स्थानीय मुद्रा में बढ़ गया। अगर रुपए की विनिमय दर में गिरावट का सिलसिला जारी रहा तो खाद्य तेल का आयात महंगा बैठेगा और तदनुरूप घरेलू बाजार मूल्य भी मजबूत बना रहेगा। रबी कालीन सरसों की नई फसल मंडियों में प्रवेश करने वाली है।
खाद्य तेलों पर पिछले साल ही बुनियादी आयात शुल्क में 20 प्रतिशत बिंदु का इजाफा कर दिया गया था जिससे इसके आयात खर्च में बढ़ोत्तरी हो गई।
अब रुपए के अवमूल्यन से भारतीय आयातकों को ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ रही है। इंडोनेशिया एवं मलेशिया में पाम तेल का निर्यात ऑफर मूल्य ऊंचे स्तर पर मजबूत बना हुआ है फिर भी भारत में इसका आयात जारी रहेगा।
