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अफ्रीकी देशों की मजबूत मांग से भारतीय चावल का निर्यात बढ़ने के आसार

03-Oct-2026 12:11 PM

अफ्रीकी देशों की मजबूत मांग से भारतीय चावल का निर्यात बढ़ने के आसार

नई दिल्ली। अल नीनो मौसम चक्र के गंभीर प्रकोप की आशंका तथा ईरान अमरीका एवं रूस-यूक्रेन के बीच जारी भयंकर जंग को देखते हुए अफ्रीकी देशों ने चावल की भारी खरीद करके इसका ऊंचा स्टॉक बनाना शुरू कर दिया है। इससे भारत से चावल के निर्यात शिपमेंट की गति तेज तथा कीमत ऊंची होती जा रही है। ज्ञात हो कि भारत से चावल (गैर-बासमती) का सबसे ज्यादा निर्यात अफ्रीकी देशों को ही किया जाता है। 

पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र में भयंकर अशांति है और कई जलमार्ग व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही के लिए सुरक्षित नहीं है। इसी तरह रूस-यूक्रेन में हो रही लड़ाई के कारण काला सागर का जलमार्ग खतरनाक हो गया है। अफ्रीकी देश स्थिति के और भी विषम होने से पहले अपनी नागरिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत से विशाल मात्रा में चावल का आयात करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके फलस्वरूप चावल का वैश्विक बाजार भाव बढ़ता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों के दौरान भारतीय चावल के निर्यात ऑफर मूल्य में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो गई। 

दिल्ली के एक अग्रणी निर्यातक का कहना है कि अफ्रीकी देश बफर स्टॉक बनाने के लिए चावल की ज्यादा से ज्यादा खरीद कर रहे हैं। ऐसी स्थिति बहुत कम देखी जा सकती है। काकीनाडा बंदरगाह पर एक साथ 20 जहाज लंगर डाले हुए हैं जिस पर 6 लाख टन चावल की लोडिंग हो सकती है। सभी बंदरगाहों पर चावल की लोडिंग के लिए जहाज देखे जा रहे हैं। अफ्रीकी देशों को खाद्य सुरक्षा की चिंता सता रही है। कुछ देश तो सामान्य स्तर की तुलना में दोगुनी मात्रा में चावल की खरीद कर रहे हैं कुछ निर्यातक पुराने सौदे को निपटाने में व्यस्त है क्योंकि ईरान युद्ध के कारण उसके  शिपमेंट में देर हो गई थी। 

वियतनाम को फिलीपींस में चावल का निर्यात करने में कठिनाई हो रही है। पिछले दो-तीन दिनों से समस्या बढ़ गई है। इससे वियतनाम को अफ्रीकी देशों में अपने चावल का निर्यात बढ़ाने का प्रयास करना पड़ेगा। कई भारतीय जहाज वियतनाम भेजे गए थे मगर वे बीच समंदर में अभी भी अटके हुए है। वियतनामी चावल का निर्यात ऑफर मूल्य भी नरम पड़ गया है। 5 प्रतिशत टूटे भारतीय सेला चावल का फ्री ऑन बोर्ड निर्यात ऑफर मूल्य मई में 355 डॉलर प्रति टन चल रहा था जो अब बढ़कर 390 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है।