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03-Oct-2026 12:41 PM
नई दिल्ली। हालांकि खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल से ऊपर पहुंच गया है और पिछले साल की तुलना में धान को छोड़कर अन्य फसलों का रकबे में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं आया है लेकिन मानसून की वर्षा कम तथा अनियमित होने से कई इलाकों में खरीफ फसलों की सेहत पर असर पड़ रहा है।
इसके फलस्वरूप बिजाई क्षेत्र के अनुरूप उत्पादन होने में संदेह है। धान (चावल), मक्का, मूंग, कपास, अरंडी एवं सोयाबीन का रकबा गत वर्ष से पीछे है। इससे इसकी पैदावार घटने की संभावना है।
इसके साथ-साथ तुवर एवं उड़द के उत्पादन में भी कमी आने की संभावना है। यद्यपि इसका क्षेत्रफल गत वर्ष से आगे निकल गया है लेकिन कर्नाटक, महाराष्ट्र एवं तेलंगाना में बारिश का अभाव होने से फसलों की प्रगति प्रभावित हो रही है।
महाराष्ट्र में सोयाबीन एवं कपास की फसल पर भी खतरा बना हुआ है जबकि वह इसका दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है। कर्नाटक में भी इन दोनों फसलों का अच्छा उत्पादन होता है। धान का रकबा अनेक राज्यों में घटा है। अरंडी की बिजाई गुजरात एवं राजस्थान जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों में कम हुई है। मक्का का रकबा भी प्रमुख उत्पादक राज्यों में कुछ पीछे रह गया है।