अक्टूबर-दिसम्बर की तिमाही में बासमती चावल का बेहतर निर्यात

20-Mar-2025 05:08 PM

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में यानी अक्टूबर-दिसम्बर 2024 के दौरान देश से बासमती चावल का बेहतर निर्यात हुआ। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर 2024 में बासमती चावल की निर्यात आय 51 करोड़ डॉलर के करीब रही थी

जो नवम्बर में घटकर 38 करोड़ डॉलर के आसपास आने के बाद दिसम्बर में पुनः उछलकर 56.20 करोड़ डॉलर पर पहुंच गई।

हालांकि घरेलू प्रभाग में बासमती धान के नए माल की आवक सितम्बर के अंतिम सप्ताह में ही आरंभ हो गई थी लेकिन जोरदार आपूर्ति अक्टूबर-दिसम्बर में हुई। 

केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधीनस्थ निकाय- कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्तमान वित्त वर्ष (2024-25) के आरंभिक नौ महीनों में यानी अप्रैल- दिसम्बर 2024 के दौरान देश से बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 42.40 लाख टन पर पहुंच गया जो अप्रैल-दिसम्बर 2023 के शिपमेंट 35.40 लाख टन से 7 लाख टन अधिक रहा।

इसके फलस्वरूप इसी अवधि में बासमती चावल के निर्यात से प्राप्त आमदनी भी 3.97 अरब डॉलर से 35 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.32 अरब डॉलर पर पहुंच गई। 

उद्योग समीक्षकों के अनुसार यदि 950 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) को कायम रखा जाता तो चालू वित्त वर्ष के दौरान बासमती चावल के शिपमेंट में गिरावट आ सकती थी या अधिक से अधिक इसका शिपमेंट पिछले वित्त वर्ष के बराबर रह सकता था लेकिन मेप के हटने से भारतीय निर्यातकों को कम दाम पर बासमती चावल का निर्यात अनुबंध एवं शिपमेंट करने का अवसर मिल गया।

अब कुछ विश्लेषक कह रहे हैं कि अनेक निर्यातकों को अनावश्यक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है इसलिए सरकार को कम दाम पर चावल का निर्यात करने वालों पर शिकंजा कसना चाहिए। बासमती चावल एक प्रीमियम क्वालिटी का उत्पाद है और इसकी मर्यादा बरकरार रहनी चाहिए। 

मेप की समाप्ति के बाद बासमती चावल के निर्यात ऑफर मूल्य में करीब 250 डॉलर प्रति टन की भारी गिरावट आ गई। इसके फलस्वरूप घरेलू प्रभाग में बासमती धान की कीमतों में भी अपेक्षित बढ़ोत्तरी नहीं हो सकी। चावल की निर्यात आय में कुल मिलाकर गिरावट आ रही है।