अमरीका की टैरिफ धमकी से भारतीय चावल निर्यातक विचलित नहीं
10-Dec-2025 11:38 AM
नई दिल्ली। हालांकि ट्रम्प प्रशासन ने भारतीय चावल पर और अधिक टैरिफ लगाने की धमकी दी है लेकिन भारत के निर्यातक इससे ज्यादा विचलित नहीं हैं।
27 अगस्त से ही अमरीका में भारतीय चावल के आयात पर 50 प्रतिशत का भारी-भरकम आयात शुल्क लगा हुआ है जिससे वहां आम लोगों को काफी कठिनाई हो रही है।
निर्यातकों का कहना है कि टैरिफ में बढ़ोत्तरी कोई गंभीर चिंता की बात नहीं है क्योंकि अमरीकी बाजार कीमतों के मामले में सबसे कम लचीले बाजारों में से एक है भारत से चावल के होने वाले अत्यन्त विशाल निर्यात के सापेक्ष अमरीकी बाजार काफी छोटा है और इसलिए अगर अमरीका में शिपमेंट आंशिक रूप से प्रभावित होता है तो भी भारत पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
इतना ही नहीं बल्कि भारतीय चावल का निर्यात बाजार लगातार फैलता जा रहा है और अनेक नए-नए देशों में इसकी पहुंच सुनिश्चित हो रही है।
भारत में उत्पादित लम्बे दाने एवं प्रीमियम क्वालिटी वाले खुशबूदार बासमती चावल का भाव प्रतिस्पर्धी स्तर पर रहता है जिससे इसके निर्यात में बढ़ोत्तरी हो रही है।
अनेक देशों में इस चावल के उपभोक्ताओं का एक विशाल, मजबूत एवं स्थायी आधार भी है। अमरीका में भी भारत से मुख्यतः:बासमती चावल या उच्च क्वालिटी के गैर बासमती चावल का आयात किया जाता है।
इंडियन राईस एस्पोर्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष का कहना है कि भारत से करीब 60 लाख टन चावल का वार्षिक निर्यात होता है जिसके 3 प्रतिशत से भी कम भाग का शिपमेंट अमरीका को किया जाता है।
भारत से अमरीका को कुल चावल निर्यात के 1 प्रतिशत से भी कम भाग का शिपमेंट हो रहा है। भारत तकरीबन 210 लाख टन चावल का औसत वार्षिक निर्यात करता है।
यदि अमरीका टैरिफ में वृद्धि करता है तो भी भारत अन्य देशों में निर्यात बढ़ाकर इसकी भरपाई कर सकता है। अमरीका में थाईलैंड से भी चावल मंगाया जाता है जबकि चीन ने अमरीकी चावल के एक खरीदार देश के बाजार पर कब्जा कर लिया है।
