अमरीकी कृषि उत्पादों पर भारत सहित अनेक देशों में ऊंचे आयात शुल्क से अमरीका नाखुश

01-Apr-2025 03:17 PM

वाशिंगटन। अमरीका की प्रेस सचिव ने कहा है कि भारत में अमरीकी कृषि उत्पादों पर 100 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया जाता है जबकि जापान तथा कनाडा में भी इस पर काफी ऊंचे स्तर का सीमा शुल्क लागू है। इसके फलस्वरूप इन देशों में अमरीकी उत्पादों का निर्यात करना लगभग असंभव हो गया है। 

उल्लेखनीय है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बार-बार अमरीकी उत्पादों पर भारत सहित कुछ अन्य देशों द्वारा लगाए गए भारी भरकम आयात शुल्क की आलोचना करते रहे हैं।

उन्होंने 2 अप्रैल यानी कल से जैसे को तैसा आधार पर उन देशों के उत्पादों पर सीमा शुल्क लगाने का प्लान बनाया है। ट्रम्प ने कहा है कि 2 अप्रैल अमरीका के लिए "मुक्ति दिवस" जैसा होगा। 

प्रेस सचिव के अनुसार दुर्भाग्य से ये देश लम्बे समय से अमरीका पूंजी को लूट रहे हैं और उसने अमरीकी श्रमिकों के लिए खतरा पैदा कर दिया है। असमान व्यापारिक प्रक्रिया चल रही है।

उपरोक्त देश अमरीकी बाजारों में अपना उत्पाद धड़ल्ले से उतार रहे हैं मगर अपने बाजारों में अमरीकी उत्पादों को पहुंचने नहीं दे रहे हैं।

यूरोपीय संघ में अमरीकी डेयरी उत्पादों पर 50 प्रतिशत तथा जापान में अमरीकी चावल पर 700 प्रतिशत का भारी-भरकम आयात शुल्क लगा हुआ है।

इसी तरह भारत ने अमरीकी कृषि उत्पादों पर 100 प्रतिशत और कनाडा ने अमरीका के मक्खन एवं पनीर पर करीब 300 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा रखा है। 

इतने भारी-भरकम सीमा शुल्क के कारण इन देशों में अमरीकी उत्पादों का निर्यात लगभग असंभव हो गया है और इसलिए ट्रम्प प्रशासन काफी नाखुश हैं।

उसका कहना है कि इस असमान धरातल के कारण अमरीकी निर्यातकों को इन बाजारों तक पहुंचने में सफलता नहीं मिल रही है और उद्योग- व्यापार क्षेत्र को पिछले कई दशकों से आघात लग रहा है।

अमरीका चाहता है कि या तो ये देश अमरीकी उत्पादों पर आयात शुल्क में भारी कटौती कर दे या फिर अमरीका में उसके अनुरूप (रेसिप्रोकल) टैक्स का सामना करे।

प्रेस सचिव ने कहा कि जो देश टैरिफ के मामले में अमरीका के साथ जैसा व्यवहार करेगा, अमरीका भी उसके प्रति वैसे ही रवैया अपनाएगा।

यह अमरीकी राष्ट्रपति के लिए ऐतिहासिक निर्णय लेने का समय है। उन्हें अमरीका के लोगों के हित में सर्वाधिक अनुकूल फैसला लेना है और 2 अप्रैल को इसकी घोषणा के साथ स्थिति स्पष्ट  हो जाएगी।