अमरीका में भारतीय चावल के आयात पर टैरिफ बढ़ाने को लेकर असमंजस
11-Dec-2025 08:35 PM
न्यू जर्सी। हालांकि स्वदेशी चावल उद्योग की मांग पर सकारात्मक रवैया अपनाते हुए अमरीका के राष्ट्रपति ने कहा है कि भारत को अमरीकी बाजारों में अपने चावल के विशाल निर्यात को नियंत्रित करना चाहिए अन्यथा अमरीकी प्रशासन को कुछ कदम उठाना पड़ेगा।
लेकिन भारतीय निर्यातकों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रम्प की धमकी का भारत पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा और उल्टे टैरिफ में वृद्धि होने पर अमरीका के आम उपभोक्ताओं की कठिनाई बढ़ जाएगी।
अमरीका मुख्यतः भारत से बासमती चावल का आयात करता है जिसका उत्पादन वहां (इस नाम से) नहीं हो सकता है। इसके अलावा अमरीका में रह रहे दक्षिण भारतीय लोगों को भारत में उत्पादित खास किस्मों का चावल बहुत पसंद आता है।
भारत से लगभग 60 लाख टन बासमती चावल का औसत वार्षिक निर्यात होता है जिसमें से 3 प्रतिशत से भी कम भाग का शिपमेंट अमरीका को किया जाता है इसी तरह वहां गैर बासमती चावल का भी अत्यन्त सीमित निर्यात होता है। दिलचस्प तथ्य यह है
कि अमरीका में 27 अगस्त 2025 से ही भारतीय चावल पर 50 प्रतिशत का भारी-भरकम टैरिफ लगा हुआ है लेकिन फिर भी अमरीकी राइस मिलर्स भारतीय चावल की डम्पिंग की शिकायत कर रहे हैं और अमरीकी राष्ट्रपति इसे सही भी मान रहे हैं जबकि उन्हें पता भी नहीं है कि भारत से प्रतिमाह औसतन कितने चावल का आयात हो रहा है।
उद्योग-व्यापार समीक्षकों का कहना है कि प्रीमियम क्वालिटी के भारतीय बासमती चावल की वैश्विक मांग अत्यन्त मजबूत रहती है
इसलिए अगर अमरीका में एंटी डम्पिंग शुल्क या किसी अन्य तरह का अवरोध लगाया जाता है तो भी भारत को ज्यादा नुकसान नहीं होगा क्योंकि इसकी पहुंच नए-नए बाजारों में बढ़ रही है।
