अनेक राज्यों में मानसून की अनेक वर्षा से खरीफ फसलों को भारी क्षति

05-Dec-2025 08:48 PM

नई दिल्ली। फसल शोषण एवं प्लांट रिकवरी सोल्यूबल्स के क्षेत्र में वित्त वर्ष एक अग्रणी कम्पनी ने अपनी आंतरिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में सामान्य औसत से 25 से 60 प्रतिशत तक अधिक बारिश होने तथा खेतों में लम्बे समय तक पानी का जमाव रहने से खरीफ फसलों को भारी क्षति हुई। इसके बावजूद विभिन्न जिंसों का बाजार भाव नरम चल रहा है जिससे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। 

कम्पनी के अनुसार वर्षा और फसल क्षति का उसका आंकलन खेतों पर किए गए सर्वेक्षण डीलरों से प्राप्त फीड बैक तथा कृषि अर्थ आदि वर्षों के अनुमान पर आधारित है।

इस आंकलन से स्पष्ट पता चलता है कि वर्ष 2025 के खरीफ सीजन में विभिन्न फसलों को पिछले कई साल की तुलना में सबसे ज्यादा बाधाओं का सामना करना पड़ा। 

कम्पनी की रिपोर्ट के मुताबिक मई से अक्टूबर 2025 के दौरान दक्षिण पश्चिम मानसून की वर्षा काफी हद तक अनियमित एवं अनिश्चितता बनी रही।

इसके फलस्वरूप महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, बिहार तथा उत्तरी भारत के अन्य भागों में अनेक जिलों में उस समय सामान्य औसत की तुलना में 25 से 60 प्रतिशत तक अधिशेष वर्षा हुई जब खरीफ फसलें प्रगति के महत्वपूर्ण चरण से गुजर रही थी।

इस जोरदार बारिश के कारण पौधे पानी में डूब गए उसके फूल झड़ गए, उसमें फंगस रोग का खतरा बढ़ गया तथा कीड़ों-रोगों का आघात भी होने लगा कृषि तथा बागवानी फसलों के लिए यह अधिशेष वर्षा घातक साबित हुई। 

महाराष्ट्र में फसलों को भारी नुकसान हुआ और वहां दलहन-तिलहन तथा कपास की फसल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इसी तरह फलों-सब्जियों की फसल को भी काफी नुकसान हुआ।

उधर पंजाब और राजस्थान में बाढ़ का प्रचंड प्रकोप रहा। पंजाब में धान की फसल कई क्षेत्रों में चौपट हो गई। इसका प्रमाण यह है कि केन्द्र सरकार ने वहां 180 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा था

जबकि वास्तविक खरीद 155-156 लाख टन तक ही पहुंच सकी। कर्नाटक तथा राजस्थान में मूंग की फसल को नुकसान हुआ जबकि अलग-अलग राज्यों में उड़द एवं सोयाबीन की फसल भी क्षतिग्रस्त हुई।