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25-Sep-2026 01:10 PM
मुम्बई। महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं तमिलनाडु जैसे अग्रणी गन्ना उत्पादक राज्यों में मानसून की बारिश कम होने से चीनी का उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है जिससे भारत को लगातार दूसरे साल भी चीनी के आयात की आवश्यकता पड़ सकती है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में पानी के भारी अभाव से गन्ना की औसत उपज दर तथा गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर में कमी आने की आशंका है।
उल्लेखनीय है कि ब्राजील के बाद भारत दुनिया में चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। यहां पिछले करीब एक दशक तक अधिशेष उत्पादन होने के बाद 2024-25 के सीजन में चीनी का उत्पादन घरेलू जरूरत से कम हुआ और 2025-26 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में भी यही स्थिति रही। इसके फलस्वरूप जब बाजार भाव उछलकर सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया तब सरकार को टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) प्रणाली के अंतर्गत विदेशों से 10 लाख टन कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने के लिए विवश होना पड़ा।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार 2025-26 के मार्केटिंग सीजन की समाप्ति पर भारतीय उद्योग के पास चीनी का बकाया अधिशेष स्टॉक घटकर पिछले अनेक वर्षों के निचले स्तर पर सिमट जाएगा और अगर 2026-27 के सीजन में उत्पादन घरेलू मांग एवं जरूरत से कम हुआ (जिसकी प्रबल संभावना है) तो विदेशों से इसके आयात की आवश्यकता बढ़ सकती है।
चीनी निर्माण में पानी का भारी उपयोग होता है मगर महारष्ट्र और कर्नाटक में हालात बिगड़ रहे हैं। कर्नाटक देश में गन्ना एवं चीनी का तीसरा सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है। वहां सरकार ने पेयजल के लिए पानी का स्टॉक को आरक्षित रखने का निर्णय लिया है जबकि महाराष्ट्र सरकार भी इसी तरह का निर्णय लेने पर विचार कर रही है। महाराष्ट्र देश में चीनी का सबसे अग्रणी उत्पादक राज्य माना जाता है।