भारत में एथनॉल उत्पादन की क्षमता 1990 करोड़ लीटर के बीच पहुंची
10-Dec-2025 08:44 PM
मुम्बई। गन्ना अवयवों के साथ-साथ अनाज आधारित डिस्टीलरीज का तेजी से विकास-विस्तार होने के कारण नवम्बर 2025 में देश के अंदर एथनॉल की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 1990 करोड़ लीटर के करीब पहुंच गई लेकिन अनेक कारणों से डिस्टीलरीज को अपनी सकल क्षमता का उपयोग करने में सफलता नहीं मिल रही है।
पहली बात तो यह है कि भारत में पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण का लक्ष्य फिलहाल 20 प्रतिशत ही निर्धारित है और यह लक्ष्य पहले ही हासिल किया जा चुका है।
जब मिश्रण के लक्ष्य में बढ़ोत्तरी होगी तभी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) अधिक मात्रा में एथनॉल की आपूर्ति का टेंडर जारी कर पाएंगी और डिस्टीलर्स को उत्पादन बढ़ाने का प्रोत्साहन मिलेगा।
दूसरी बात यह है कि सरकार अक्सर चीनी के बेहतर उत्पादन के लिए एथनॉल निर्माण में गन्ना के उपयोग का स्तर घटाती-बढ़ाती रहती है जिससे डिस्टीलरीज को असुविधा होती है।
भारत का एथनॉल सेक्टर नियमित रूप से आगे बढ़ रहा है। एथनॉल के घरेलू उत्पादन एवं मिश्रण में हाल के वर्षों के दौरान अच्छी प्रगति हुई है।
डिस्टीलरीज की उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ रही है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में उसे अपनी क्षमता का अधिकतम उपयोग करने का अवसर मिल सकेगा।
पहले केवल गन्ना जूस एवं सीरप, बी-हैवी शीरा, सी हैवी शीरा, चावल एवं क्षतिग्रस्त अनाज से एथनॉल का उत्पादन होता था लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इसके निर्माण में मक्का की विशाल मात्रा का इस्तेमाल होने वाला है और इसके साथ ही डिस्टीलरीज की क्षमता भी तेजी से बढ़ गई है।
इसके परिणामस्वरूप ओएमसी द्वारा एथनॉल की आपूर्ति का जो टेंडर जारी किया जाता है उसमें मक्का से निर्मित एथनॉल की मात्रा सबसे अधिक होती है।
ध्यान देने की बात है कि एथनॉल फ्यूल एक नवीकरणीय जैव ईंधन है और मक्का, चावल तथा गन्ना अवयवों से इसका निर्माण होता है।
डिस्टीलरीज को एथनॉल निर्माण के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से भारी मात्रा में सस्ता चावल प्राप्त हो रहा है।
यदि तेल विपणन कंपनियां ज्यादा मात्रा में आपूर्ति का टेंडर जारी करेगी तो डिस्टीलर्स को भी एथनॉल का उत्पादन बढ़ाने का अच्छा प्रोत्साहन हासिल होगा।
