भारत में क्रूड खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में हुई कटौती से नेपाल को आघात

03-Jun-2025 12:03 PM

काठमांडू। घरेलू प्रभाग में खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों में आ रही तेजी को नियंत्रित करने तथा स्वदेशी रिफाइनिंग उद्योग के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेते हुए क्रूड श्रेणी के खाद्य तेलों पर बुनियादी आयात शुल्क को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत निर्धारित कर दिया है जबकि रिफाइंड खाद्य तेल पर आयात शुल्क के ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया गया। इससे रिफाइंड खाद्य तेलों का आयात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

साफ्टा संधि के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए नेपाल भारत को विशाल मात्रा में रिफाइंड तेलों का निर्यात करता रहा है। अब शुल्कांतर बढ़ने से रिफाइंड खाद्य तेल का आयात करना ज्यादा लाभदायक नहीं रहेगा।

वैसे साफ्टा संधि के तहत नेपाल से भारत में खाद्य तेलों का शुल्क मुक्त आयात होता है लेकिन यदि स्वदेशी रिफाइंड तेल का भाव आयातित रिफाइंड तेल के बराबर या उससे कुछ नीचे हो जाएगा तो नेपाल से आयात में स्वाभाविक रूप से गिरावट आ जाएगी। 

क्रूड खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में 50 प्रतिशत की कटौती होने से भारत में इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड जैसे देशों से भी आरबीडी पामोलीन के आयात में भारी गिरावट आने की संभावना है।

स्वदेशी उद्योग इसका आयात बढ़ने से बहुत परेशान था और इस पर अंकुश लगाने की मांग सरकार से कर रहा था। अब उसकी मांग पूरी हो गई है।

उद्योग ने सुझाव दिया था कि क्रूड खाद्य तेल की तुलना में रिफाइंड खाद्य तेलों पर कम से कम 20 प्रतिशत ज्यादा सीमा शुल्क लागू होना चाहिए।  

भारत सरकार क्रूड श्रेणी के पाम तेल, सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल पर बुनियादी आयात शुल्क (बेसिक कस्टम ड्यूटी) को 20 प्रतिशत से आधा या 50 प्रतिशत घटाकर 10 प्रतिशत नियत कर दिया जो 30 मई 2025 से प्रभावी हो गया।

इसके फलस्वरूप अन्य सेस के साथ अब क्रूड खाद्य तेलों पर कुल मिलाकर 16.5 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगेगा जो पहले 27.5 प्रतिशत था। 

नेपाल में तिलहन-तेल का अत्यन्त सीमित उत्पादन होता है जबकि वह भारत को विशाल मात्रा में रिफाइंड खाद्य तेल का निर्यात कर रहा है।

दरअसल वह विदेशों से क्रूड तेल मंगाकर अपनी इकाइयों में उसकी रिफाइनिंग करवाता है और फिर नेपाली रिफाइंड खाद्य तेल के तौर पर भारत में उसका निर्यात करता है। इस प्रक्रिया पर आगे काफी हद तक अंकुश लगने की संभावना है जिससे नेपाली रिफाइनिंग उद्योग को जबरदस्त आघात लग सकता है।