भारत में लाल मसूर का उत्पादन सरकारी अनुमान से बहुत कम होने का दावा

04-Jun-2025 07:29 PM

नई दिल्ली। एक अग्रणी व्यापारिक फर्म का कहना है कि भले ही केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2024-25 के मार्केटिंग रबी सीजन के दौरान मसूर का उत्पादन उछलकर 18 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है लेकिन वास्तव में लाल मसूर का उत्पादन 10-12 लाख टन से ज्यादा नहीं हुआ है।

भारत में पिछले अनेक वर्षों से मसूर के लिए सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करती रही है जिससे इसका भाव 700-800 डॉलर प्रति टन के बीच रहता है।

वास्तविक फर्म के अनुसार देश में फिलहाल करीब 10 लाख टन मसूर का स्टॉक मौजूद है जिसमें सरकारी गोदामों में उपलब्ध भंडार के साथ विदेशों से आयातित माल का विभिन्न बंदरगाहों पर मौजूद स्टॉक भी शामिल है। यह स्टॉक अगले चार-पांच महीनों तक घरेलू मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। 

केन्द्र सरकार ने मसूर के आयात पर 10 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा दिया है जिससे हाल- फिलहाल इसका आयात करना आर्थिक दृष्टि से ज्यादा लाभप्रद साबित नहीं होगा। अक्टूबर-नवम्बर से पूर्व भारत में मसूर का जोरदार आयात होना मुश्किल है।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मांग की अपेक्षा लाल मसूर की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद है लेकिन अगर ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख उत्पादक राज्यों / क्षेत्रों में सूखे का संकट बरकरार रहा तो कुल वैश्विक उपलब्धता में 8 लाख टन तक की गिरावट आ सकती है।

उधर तुर्की में मसूर का पिछला बकाया स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है। आमतौर पर वहां प्रति वर्ष 5.00-5.50 लाख टन मसूर का आयात होता है और इसका अधिकांश भाग कनाडा से मंगाया जाता है लेकिन अब इसके बाजार में रूस और कजाकिस्तान की मसूर भी अच्छी मात्रा में पहुंचने लगी है।

तुर्की में इन दोनों देशों से 2023- 24 के सीजन में 1.30 लाख टन मसूर का आयात हुआ था जो 2024-25 के सीजन में बढ़कर 1.80 लाख टन पर पहुंच गया। तुर्की में शीघ्र ही मसूर का आयात 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ सकता है जबकि पहले यह 20-25 प्रतिशत ही रहता था।