भारत में रूई के शुल्क मुक्त आयात का निर्णय अमरीका के लिए अच्छा संकेत

01-Sep-2025 04:07 PM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने रूई के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा 31 दिसम्बर 2025 तक बढ़ा दी है जबकि पहले इस पर 11 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा हुआ था। दरअसल कपास का घरेलू उत्पादन 2023-24 के 336.50 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) से घटकर 2024-25 के सीजन में 344.40 लाख गांठ रह गया।

2013-14 के सीजन में कपास का उत्पादन 398 लाख गांठ के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा था। चालू खरीफ सीजन के दौरान कपास के बिजाई क्षेत्र में 2.6 प्रतिशत की गिरावट आ गई जिससे सरकार को रूई के शुल्क मुक्त आयात की अवधि बढ़ानी पड़ी। लेकिन सरकार का यह निर्णय अमरीका के लिए एक सकारात्मक संदेश है। 

अमरीका से वर्ष 2022 में 8.82 अरब डॉलर मूल्य की रूई का निर्यात हुआ था जो 2024 में घटकर 4.96 अरब डॉलर पर अटक गया इसका प्रमुख कारण चीन के आयात में भारी कमी आना रहा।

चीन में अमरीका से रूई का आयात इस अवधि में 2.79 अरब डॉलर से घटकर 1.47 अरब डॉलर पर अटक गया। इतना ही नहीं बल्कि 2025 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में वहां आयात और भी लुढ़ककर 15.04 करोड़ डॉलर पर सिमट गया।

इससे अमरीका को भारी कठिनाई हो रही है और ऐसी हालत में भारत में रूई के शुल्क मुक्त आयात का निर्णय उसके रूई उत्पादकों एवं निर्यातकों के लिए वरदान साबित हो सकता है।

ट्रम्प प्रशासन ने भारत के इस फैसले का स्वागत भी किया है। अब अमरीका को भी भारतीय उत्पादों के आयात पर लगाए गए 25 प्रतिशत के अमरीका सीमा शुल्क को हटाने पर विचार करना चाहिए।

जनवरी-जून 2025 की छमाही में भारत ने अमरीका से 18.15 करोड़ डॉलर मूल्य की रूई का आयात किया जो वर्ष 2024 की इसी अवधि के आयात 8.69 करोड़ डॉलर के दोगुने से भी ज्यादा है।

सीमा शुल्क के हटने से भारत में अमरीकी रूई का आयात आगे और बढ़ सकता है। अमरीका से आयातित रूई के प्रसंस्कृत माल की भागीदारी 95 प्रतिशत रहती है जिससे भारतीय मिलर्स उससे यार्न, फैब्रिक्स एवं वस्त्र उत्पाद बनाकर दोबारा उसे विश्व बाजार में बेच सकते हैं। लेकिन अमरीकी बाजार में सीमा शुल्क की वजह से कुछ समस्या उत्पन्न होने लगी है।